कार्यवाही नहीं होने से निजी बस ऑपरेटरों का बढ़ रहा है मनोबल
अंबिकापुर। रायपुर, बिलासपुर, बनारस और रांची जैसे बड़े शहरों से चलने वाली निजी बसों में इन दिनों यात्रियों से ज्यादा लगेज ढुलाई का कारोबार फल- फूल रहा है। आरोप है कि कई बस संचालक यात्री परिवहन की आड़ में बड़े पैमाने पर पार्सल और संदिग्ध सामान की ढुलाई कर रहे हैं। इस दौरान जीएसटी नियमों की अनदेखी, टैक्स चोरी और अवैध वस्तुओं के परिवहन की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार लंबी दूरी की कई बसों में लगेज बुकिंग का अलग नेटवर्क संचालित हो रहा है। बस स्टैंड और एजेंटों के माध्यम से बिना किसी वैध दस्तावेज और जांच के पार्सल स्वीकार किए जा रहे हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, कॉस्मेटिक सामग्री, किराना, दवाइयां और अन्य व्यावसायिक सामग्री तक शामिल होने की बात कही जा रही है। कई मामलों में सामान के साथ जीएसटी बिल या परिवहन दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं रहते।
सीटों के नीचे और छत तक भर रहे पार्सल
यात्रियों का आरोप है कि कई बसों में सीटों के नीचे, गैलरी और डिक्की तक में इतना अधिक सामान भर दिया जाता है कि सफर करना मुश्किल हो जाता है।
कुछ बसों में तो यात्रियों के सामान रखने तक की जगह नहीं बचती। बावजूद इसके परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से यह कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय बसों के जरिए बड़े पैमाने पर पार्सल भेजे जाते हैं। कई बार संदिग्ध पैकेट भी बिना जांच के लोड किए जाते हैं, जिससे अवैध वस्तुओं की ढुलाई की आशंका बनी रहती है।
सूत्रों के अनुसार कुछ बस ऑपरेटर लगेज के नाम पर अलग से मोटी रकम वसूलते हैं, लेकिन उसका कोई वैध रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।
जीएसटी और परिवहन नियमों पर उठ रहे सवाल
व्यापारिक सामग्री के परिवहन में जीएसटी ई-वे बिल और अन्य दस्तावेज जरूरी होते हैं, लेकिन आरोप है कि अधिकांश मामलों में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। इससे शासन को राजस्व नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। परिवहन नियमों के अनुसार यात्री बसों में सीमित मात्रा में ही लगेज ले जाने की अनुमति होती है, लेकिन कई बसों में इसे ही मुख्य व्यवसाय बना लिया गया है। बसों के जरिए अवैध ढुलाई का यह नेटवर्क अब कई राज्यों तक फैल चुका है।
कार्रवाई नहीं होने से बढ़ रहा नेटवर्क
स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। इसी का फायदा उठाकर कुछ बस संचालक खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। लोगों ने परिवहन विभाग, जीएसटी विभाग और पुलिस प्रशासन से संयुक्त जांच अभियान चलाने की मांग की है ताकि अवैध ढुलाई और टैक्स चोरी पर रोक लगाई जा सके। क्षेत्र में चर्चा है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर सख्ती नहीं की गई तो यात्री बसें पूरी तरह पार्सल परिवहन का माध्यम बन जाएंगी, जिससे सुरक्षा और कानून व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं।