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अंबिकापुर के मिशन चौक में स्थित दाबेली टुन-टुन दुकान के संचालक अमन ओझा की संदिग्ध मौत पर लोग जता रहे है हत्या की आशंका,

Priyanshu Ranjan

मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए सामाजिक कार्यकर्ता व बीजेपी पार्षद आलोक दुबे ने सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक दीपक झा को सौंपा ज्ञापन

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अंबिकापुर । मिशन चौक स्थित दाबेली टुन-टुन दुकान के संचालक अमन ओझा की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता व बीजेपी पार्षद आलोक दुबे ने सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक दीपक झा को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

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      ज्ञापन में अमन ओझा की मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई गई है तथा सरगुजा पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि अमन ओझा, जो अम्बिकापुर के मिशन चौक क्षेत्र में दाबेली टुन-टुन नामक दुकान संचालित करता था, उसकी लाश पड़ोसी राज्य झारखंड के गढ़वा जिले में संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुई। जिस परिस्थिति में शव मिला है, उससे हत्या की आशंका को बल मिल रहा है। इस घटना ने शहर में चर्चा और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

मौत से पहले सोशल मीडिया,पर जताई थी हत्या की आशंका,,,

     ज्ञापन के अनुसार अमन ओझा ने अपनी मौत से तीन- चार दिन पहले सोशल मीडिया

प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक वीडियो सार्वजनिक किया था। वीडियो में उसने खुद की जान को खतरा बताते हुए कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे।

      अमन ने वीडियो में कहा था कि उसकी पत्नी और बच्चे को जय स्तंभ चौक क्षेत्र का एक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। इस घटना के बाद से वह मानसिक रूप से बेहद परेशान था।

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     बताया गया कि अमन ओझा ने अप्रैल 2026 में इस संबंध में कोतवाली थाना अम्बिकापुर तथा कलेक्टर जनदर्शन में लिखित शिकायत भी प्रस्तुत की थी। शिकायत में संबंधित युवक का नाम, धमकी देने वाले अन्य लोगों के नाम तथा मोबाइल नंबर तक दर्ज कराए गए थे। इसके बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस पर निष्क्रियता और लापरवाही का आरोप

       ज्ञापन में कहा गया है कि मामले की जानकारी कोतवाली थाना, गांधीनगर थाना, साइबर सेल और नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक थी, लेकिन इसके बावजूद न तो महिला और बच्चे की गंभीरता से तलाश की गई और न ही आरोपित युवक को पकड़ने का प्रयास हुआ।

      आलोक दुबे ने इसे पुलिस विभाग की ‘अक्षम्य घोर लापरवाही’ बताया है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि समय रहते शिकायत पर उचित कार्रवाई की जाती तो शायद अमन ओझा की जान बच सकती थी। मामले में पुलिस की निष्क्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं,जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

झारखंड पुलिस के सहयोग से जांच की मांग

     आलोक दुबे ने आईजी से मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की जाए। साथ ही झारखंड पुलिस के समन्वय से अमन ओझा की मौत के सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि अमन ओझा द्वारा सोशल मीडिया पर जारी वीडियो की साइबर सेल से तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसे किन परिस्थितियों में धमकियां मिल रही थीं।

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दोषी पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की मांग

     ज्ञापन में केवल आरोपित व्यक्तियों ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। आलोक दुबे ने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया या जांच में लापरवाही बरती, तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। ज्ञापन के साथ अमन ओझा द्वारा सोशल मीडिया पर जारी वीडियो तथा विभिन्न समाचार चैनलों में प्रसारित खबरों से संबंधित पेन ड्राइव भी सौंपी गई है, जिसे जांच के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

शहर में बढ़ा आक्रोश

      अमन ओझा की मौत को लेकर शहर में लगातार चर्चाएं हो रही हैं। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर शिकायत और सार्वजनिक वीडियो के बावजूद पुलिस ने समय रहते संज्ञान क्यों नहीं लिया। अब पूरे मामले में आईजी स्तर पर जांच की मांग के बाद लोगों की नजर पुलिस प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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