सूरजपुर । प्रदेश की राजनीति में अक्सर लंबे काफिले, पायलट वाहन और भारी सुरक्षा व्यवस्था चर्चा का विषय बनते रहे हैं, लेकिन अब सरगुजा संभाग के तीन मंत्रियों ने इस पर अलग पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन संरक्षण और सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने की अपील के बाद संभाग के मंत्रियों ने अपने प्रोटोकॉल वाहनों के उपयोग को सीमित करने का फैसला लिया है। इस निर्णय को प्रशासनिक सादगी और सरकारी खर्च में कटौती की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा वरिष्ठ मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया है कि अब सामान्य परिस्थितियों में पायलट वाहन, फॉलो गाड़ी और अतिरिक्त प्रोटोकॉल वाहनों का उपयोग नहीं किया जाएगा। केवल सुरक्षा संबंधी विशेष परिस्थितियों या जरूरी सरकारी कार्यक्रमों में ही इन वाहनों का इस्तेमाल होगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के बीच सादगीपूर्ण छवि बनाने का प्रयास भी है। आमतौर पर मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के बड़े काफिलों को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिलती है। ऐसे में यह पहल आम लोगों के बीच सकारात्मक संदेश देने वाली मानी जा रही है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय अधिकारियों को भी अनावश्यक सरकारी वाहनों के उपयोग से बचने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ईंधन संरक्षण केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रहित से जुड़ी जिम्मेदारी है। सरकारी संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार ही होना चाहिए।
वहीं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल पहले भी अपनी सादगी को लेकर चर्चा में रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वे कई बार अपने गृह क्षेत्र में स्कूटी से घूमते नजर आए हैं। अब उनके इस निर्णय को उसी सादगीपूर्ण कार्यशैली का विस्तार माना जा रहा है।
मंत्री रामविचार नेताम ने भी अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से जरूरत के अनुसार ही वाहनों के उपयोग की अपील की है।
इसका असर स्थानीय स्तर पर भी दिखने लगा है। कई जनप्रतिनिधि अब छोटी दूरी के लिए दोपहिया वाहनों का उपयोग करते दिखाई दे रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि यह व्यवस्था लंबे समय तक लागू रहती है तो इससे सरकारी खर्च में कमी आने के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होगी।