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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संवेदनशील पहल ने वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग दंपत्ति को फिर से पहुंचाया अपने घर,

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संवेदनशील पहल ने एक बिछड़े परिवार को फिर से जोड़ने का काम किया है। पारिवारिक मतभेदों के कारण वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हुए बुजुर्ग दंपत्ति को आखिरकार अपनों का साथ फिर से मिल गया।

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यह भावुक पहल केवल कानूनी सहायता तक सीमित नहीं रही, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने और पारिवारिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का उदाहरण बन गई।

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अपनों को संतान मानकर बिताया जीवन, फिर छोड़ना पड़ा घर

मूल रूप से पटना थाना क्षेत्र निवासी श्री शंकर प्रसाद और उनकी पत्नी की अपनी कोई संतान नहीं है। परिवार में पांच भाइयों के बीच उन्होंने अपने भाइयों के बच्चों को ही संतान मानकर जीवन बिताया। लेकिन समय के साथ पारिवारिक मतभेद बढ़ते गए और परिस्थितियां ऐसी बनीं कि बुजुर्ग दंपत्ति को अपना घर छोड़कर सूरजपुर के तिलसिवा स्थित स्नेह सम्बल वृद्धाश्रम में आश्रय लेना पड़ा।

डीएलएसए की पहल से बदली स्थिति

25 मई 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर की सचिव पायल टोपनो ने वृद्धाश्रम का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जब उन्हें बुजुर्ग दंपत्ति की स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए पहल शुरू की।प्राधिकरण द्वारा परिवारजनों से संपर्क कर उन्हें न केवल कानूनी जिम्मेदारियों बल्कि नैतिक कर्तव्यों के बारे में भी समझाया गया। लगातार काउंसिलिंग और संवाद का सकारात्मक परिणाम सामने आया।

परिजन स्वयं पहुंचे वृद्धाश्रम

प्राधिकरण की पहल के बाद श्री शंकर प्रसाद के छोटे भाई श्री कृष्णा, उनकी पत्नी श्रीमती सुमित्रा और उनका पुत्र स्वयं वृद्धाश्रम पहुंचे। उन्होंने बुजुर्ग दंपत्ति को ससम्मान घर वापस ले जाने की सहमति दी। वर्षों बाद अपनों को सामने देखकर बुजुर्ग दंपत्ति की आंखें खुशी से नम हो उठीं। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहा।

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वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर भी हुई जागरूकता

इस अवसर पर तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डायमंड कुमार गिलहरें एवं व्यवहार न्यायाधीश सुश्री हिमांशी सर्राफ विशेष रूप से उपस्थित रहीं। न्यायाधीशों ने परिवारजनों को वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के महत्व के बारे में समझाया और उन्हें इस कदम के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में नालसा की वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक सेवाएं योजना 2016 तथा माता- पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 के प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।

समाज के लिए प्रेरणादायक पहल

कार्यक्रम में स्नेह सम्बल वृद्धाश्रम की अधीक्षिका पायल गुप्ता, आश्रम स्टाफ, वरिष्ठजन और पैरा लीगल वालंटियर्स भी मौजूद रहे। यह पहल एक बार फिर यह संदेश देती है कि कानून केवल सजा देने का माध्यम नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने और मानवीय संवेदनाओं को बचाए रखने का भी जरिया बन सकता है।

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