पोस्ट में इंटरनेट बंद करने, आयोजकों को प्रदर्शनकारियों से अलग करने, लाठीचार्ज और पुलिस की रणनीति को लेकर विस्तार से रखी गई बात; आधिकारिक पक्ष का इंतजार
नई दिल्ली। संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर सोशल मीडिया पर एक फेसबुक पोस्ट तेजी से चर्चा में है। पोस्ट में संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं का क्रमवार विवरण देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट का केंद्रीय सवाल है—क्या आंदोलन के आयोजकों को बदनाम करने के लिए पहले से एक नैरेटिव तैयार किया गया था?
पोस्ट के अनुसार, संसद मार्च शुरू होने से पहले कुछ प्रमुख आयोजकों को सरकार की ओर से बातचीत के लिए बुलाया गया। इसी दौरान जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बाधित हो गईं, जिससे आयोजकों और अलग-अलग स्थानों पर मौजूद प्रदर्शनकारियों के बीच संपर्क टूट गया।
पोस्ट में कहा गया है कि इसके बाद प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज हुआ और सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाया जाने लगा कि जब छात्र-छात्राएं पुलिस की कार्रवाई का सामना कर रहे थे, तब आयोजक कहां थे? पोस्ट में इसका जवाब देते हुए कहा गया है कि आयोजकों का प्रदर्शनकारियों से संपर्क पहले ही टूट चुका था और कुछ आयोजकों को पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया था।
फेसबुक पोस्ट में यह भी लिखा गया है कि घटनास्थल के आसपास पहले से ईंट-पत्थर रखे गए थे और बाद की घटनाओं के जरिए आंदोलन को हिंसक बताने की कोशिश की गई। पोस्ट में यह भी कहा गया है कि आंदोलन को बदनाम करने और उसके पीछे बाहरी या राष्ट्रविरोधी तत्वों का नैरेटिव बनाने का प्रयास हुआ।
पोस्ट में भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के कुछ समर्थकों की आलोचना करते हुए कहा गया है कि उन्होंने भी आयोजकों को निशाना बनाया और घटनाक्रम के दूसरे पक्ष पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
हालांकि, पोस्ट में व्यक्त विचार लेखक के हैं। इन बातों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और न ही इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से इन सभी बिंदुओं पर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने आई है। घटनाक्रम को लेकर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस बीच संसद मार्च और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस जारी है तथा पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों की अलग-अलग राय सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही है।