ब्रह्मपुरा से महिला गिरफ्तार, एनडीपीएस एक्ट के तहत भेजी गई जेल; लगातार कार्रवाई के बावजूद नशे की सप्लाई चेन पर अब भी बना हुआ है सवाल
अंबिकापुर। सरगुजा संभाग में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत आबकारी उड़नदस्ता टीम ने रविवार को एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए अंबिकापुर के ब्रह्मपुरा क्षेत्र से 28 नशीले इंजेक्शन के साथ एक महिला को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई संभागीय आबकारी उड़नदस्ता प्रभारी एवं सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में की गई। गिरफ्तार महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
आबकारी विभाग के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि ब्रह्मपुरा निवासी आशा पांडेय अपने घर से नशीले इंजेक्शन बेच रही है। सूचना के आधार पर टीम ने मौके पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान महिला कथित रूप से एक थैला फेंकने का प्रयास कर रही थी, जिसे मौके पर मौजूद महिला आरक्षक ने कब्जे में ले लिया। तलाशी लेने पर थैले से 19 नशीली दवाएं और 9 नशीले इंजेक्शन, कुल 28 प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामद किए गए।
विभाग का कहना है कि गिरफ्तार महिला पहले भी ब्राउन शुगर से जुड़े एक मामले में जेल जा चुकी है। ताजा सूचना मिलने पर उसके खिलाफ दोबारा कार्रवाई की गई।
लगातार कार्रवाई, फिर भी नहीं थम रहा नशे का कारोबार
बीते कुछ सप्ताह में आबकारी विभाग ने नशे के खिलाफ लगातार कई बड़ी कार्रवाई की हैं। इनमें वाहिद अंसारी, मोशीम अंसारी, लुंड्रा क्षेत्र के कथित सप्लायर, सूरजपुर के प्रदीप राजवाड़े, श्याम लॉज से साहिल तिर्की, नितीश गुप्ता और सीतापुर से 3,528 नशीले कैप्सूल की बरामदगी जैसे मामले शामिल हैं। अब इस कड़ी में ब्रह्मपुरा से आशा पांडेय की गिरफ्तारी भी जुड़ गई है।
हर कार्रवाई के बाद नया नाम क्यों?
लगातार हो रही गिरफ्तारियां एक ओर आबकारी विभाग की सक्रियता को दर्शाती हैं, लेकिन दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करती हैं कि यदि अभियान लगातार सफल हो रहा है, तो हर कुछ दिनों में नया सप्लायर या नया विक्रेता कैसे सामने आ रहा है। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के बावजूद नशीले पदार्थों की आपूर्ति का मूल स्रोत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती
अब तक की अधिकांश कार्रवाई स्थानीय स्तर पर बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रही है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि नशीले इंजेक्शनों की बड़ी सप्लाई चेन कहां से संचालित हो रही है। यह भी सामने नहीं आया है कि जब्त इंजेक्शनों के बैच नंबर के आधार पर वितरण नेटवर्क की जांच हुई या नहीं तथा इस मामले में औषधि प्रशासन और पुलिस के साथ संयुक्त जांच किस स्तर तक पहुंची है।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी
नशे के खिलाफ अभियान की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब केवल छोटे विक्रेताओं की गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय पूरे सप्लाई नेटवर्क, वित्तीय तंत्र और मुख्य सरगनाओं तक कार्रवाई पहुंचे। फिलहाल ब्रह्मपुरा की यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन क्लीन’ की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों से साफ है कि सरगुजा में नशे के कारोबार के खिलाफ लड़ाई अभी लंबी है।