मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, छत्तीसगढ़: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन की धरातल पर पोल खुल गई है। जिले के भरतपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलझर के आश्रित ग्राम सनबोरा, ददरा पारा में शौचालयों के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
कागजों में शौचालय, हकीकत में खंडहर
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता बरती गई है। निर्माण कार्य इतना घटिया है कि शौचालय बनते ही गिर गए। इन शौचालयों में न तो दरवाजे हैं, न ही पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही गड्ढे तकनीकी मानकों के अनुरूप बनाए गए हैं। आलम यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में शौचालयों को पूर्ण दिखाकर पूरी राशि का बंदरबांट कर लिया गया, जबकि धरातल पर शौचालय उपयोग के पूरी तरह अयोग्य हैं।
जनप्रतिनिधि ने खोला मोर्चा
इस अमानवीय स्थिति को लेकर जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थाई समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस भ्रष्टाचार को राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के संवैधानिक अधिकारों का सीधा अपमान करार दिया है।
श्रीमती सिंह ने जिला प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
उच्च स्तरीय जांच: निर्माण कार्य की वित्तीय और तकनीकी जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन हो।
दोषियों पर कार्रवाई: जिम्मेदार अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें निलंबित कर राशि की वसूली की जाए।
त्वरित पुनर्निर्माण: पीड़ित परिवारों के लिए 15 दिनों के भीतर मानक स्तर के नए शौचालयों का निर्माण सुनिश्चित हो।
योजनाओं का लाभ: इन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ दिलाया जाए।
प्रशासन को अल्टीमेटम
श्रीमती सुखमंती सिंह ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 7 दिनों के भीतर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और पीड़ितों को न्याय नहीं मिला, तो जनजातीय समाज के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने पर प्रशासन की सीधी जिम्मेदारी होगी।