तारा रेस्ट हाउस में जुटे जनप्रतिनिधि और प्रभावित ग्रामीण, पंचायत स्तर पर संवाद और व्यापक जनआंदोलन की रणनीति पर मंथन,
सूरजपुर। प्रेमनगर क्षेत्र में प्रस्तावित खनन गतिविधियों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन, ग्रामीणों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने व्यापक आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस प्रभावित ग्रामीणों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने ‘जल, जंगल, जमीन हमर पहचान’ का नारा देते हुए कहा कि ग्रामीणों की सहमति और उनके हितों की अनदेखी कर किसी भी गतिविधि को आगे बढ़ाने का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
कई पंचायतों पर खनन की तैयारियों का असर होने का दावा
कांग्रेस के अनुसार प्रेमनगर क्षेत्र की तारा, जनार्दनपुर, कांटारोली और मेंडरा पंचायतों सहित सलका, चंदनगर, अभयपुर और शिवनगर जैसे ग्राम पंचायत क्षेत्र प्रस्तावित खनन गतिविधियों से प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी का कहना है कि इन क्षेत्रों के ग्रामीण अपनी जमीन, जंगल, आजीविका और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
ग्रामीणों की ओर से यह बात सामने रखी गई कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास चाहते हैं जिसमें उनकी जमीन, प्राकृतिक संसाधन, आजीविका और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे। ग्रामीणों ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सिंचाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग करते हुए खनन के बजाय क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप विकास पर जोर दिया।
तारा रेस्ट हाउस में बनी आंदोलन की रणनीति
आगामी आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए तारा रेस्ट हाउस में बैठक आयोजित की गई। इसमें राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ खनन से संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों के पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में पूर्व विधायक भानुप्रताप सिंह, इस्माइल खान, अशोक जगते, मेहंदी यादव, अविनाश साहू, समर्थ प्रजापति और साधना सहित प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। विभिन्न पंचायतों के मुखिया, सरपंच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी क्षेत्र की स्थिति और ग्रामीणों की चिंताओं को बैठक में रखा।
बैठक में संभावित खनन गतिविधियों से ग्रामीणों पर पड़ने वाले प्रभाव, प्रभावित गांवों में संवाद बढ़ाने तथा पंचायतवार बैठकें आयोजित करने पर चर्चा हुई। साथ ही आने वाले दिनों में आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया।
जंगल ग्रामीणों की आजीविका का आधार: कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रेमनगर क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए जंगल महज प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और जीवन-व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। लघु वनोपज, कृषि, पशुपालन और अन्य पारंपरिक गतिविधियां बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आय से जुड़ी हैं।
पार्टी का तर्क है कि खनन गतिविधियों से जमीन और जंगल प्रभावित होने की स्थिति में विस्थापन, आजीविका और पुनर्वास जैसे सवाल सामने आ सकते हैं। इसलिए किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय लोगों के हितों, पर्यावरणीय प्रभाव और सामाजिक संरचना पर संभावित असर को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने कहा कि ‘न जंगल उजड़ने देंगे, न जमीन छिनने देंगे’ के संकल्प के साथ ग्रामीणों की आवाज को लोकतांत्रिक मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा।
पंचायत स्तर पर ग्रामीणों से संवाद की तैयारी
कांग्रेस अब प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करने की तैयारी में है। पार्टी के अनुसार आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उन्हीं ग्रामीणों की होगी, जिनकी जमीन, जंगल और आजीविका प्रस्तावित गतिविधियों से प्रभावित हो सकती है।
इसके लिए पंचायत स्तर पर बैठकें आयोजित करने, ग्रामीणों की समस्याएं सुनने और उनकी मांगों को एकजुट रूप से प्रशासन एवं शासन के समक्ष रखने की योजना बनाई जा रही है। कांग्रेस ने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही है।
कांग्रेस बोली—विरोध विकास का नहीं, विकास के तरीके का
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध विकास के खिलाफ नहीं है। पार्टी का कहना है कि विकास की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनके अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।
शशि सिंह के अनुसार प्रेमनगर क्षेत्र की पहचान उसके जंगल, जलस्रोत, कृषि भूमि और ग्रामीण जीवन से है। इन संसाधनों पर पड़ने वाला प्रभाव सीधे तौर पर स्थानीय लोगों और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ग्रामीणों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे की प्रक्रिया तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ग्रामीणों की आवाज को हर लोकतांत्रिक मंच पर उठाएगी और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
अब प्रशासन के अगले कदम पर नजर
प्रेमनगर क्षेत्र में प्रस्तावित खनन गतिविधियों के विरोध में कांग्रेस द्वारा आंदोलन की तैयारी के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों की आशंकाओं, प्रस्तावित गतिविधियों और उनके संभावित सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर क्षेत्रवासियों की नजर रहेगी।
फिलहाल तारा से शुरू हुई यह पहल आने वाले दिनों में कितना व्यापक रूप लेती है, यह प्रभावित गांवों में होने वाली बैठकों और ग्रामीणों की भागीदारी पर निर्भर करेगा। कांग्रेस ने इसे ‘जल, जंगल, जमीन और ग्रामीणों के भविष्य की लड़ाई’ बताते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है।