छत्तीसगढ़ की पहली सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला के निर्माता विनायक कोहली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान, कलेक्टर ने जिले के सभी विद्यालयों में भूगोल प्रयोगशाला शुरू करने के दिए निर्देश
रायपुर, 09 सितंबर 2026।
- भरतनाट्यम से शुरू हुआ 30 मिनट का प्रस्तुतिकरण
- 9,500 से अधिक शिक्षकों के बीच राष्ट्रीय चयन
- कोण्डागांव की संस्कृति बनी अंतरराष्ट्रीय पहचान
- सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला से लेकर बस्तर आर्ट म्यूजियम तक कई नवाचार
- मोबाइल की बढ़ती निर्भरता पर जताई चिंता
- शिक्षक का सम्मान भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा
- जिले के सभी स्कूलों में भूगोल प्रयोगशाला बनाने के निर्देश
- वन मंत्री समेत सभी सहयोगियों का जताया आभार
ऑक्सफोर्ड सईद बिजनेस स्कूल एवं शिव नादर फाउंडेशन द्वारा आयोजित इंडियाज बेस्ट टीचर्स अवॉर्ड्स 2026 में भूगोल श्रेणी का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने वाले पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोण्डागांव के सामाजिक विज्ञान शिक्षक विनायक कोहली का मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्मान किया गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने उन्हें सम्मानित करते हुए उनकी नवाचारी शिक्षण पद्धतियों की सराहना की।
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अविनाश भोई, अपर कलेक्टर अजय उरांव, विभिन्न विभागों के अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
भरतनाट्यम से शुरू हुआ 30 मिनट का प्रस्तुतिकरण
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल करने वाले विनायक कोहली ने अपने करीब 30 मिनट के प्रस्तुतिकरण की शुरुआत भरतनाट्यम की पारंपरिक नमस्कारम मुद्रा से की। पिछले सात वर्षों से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण ले रहे कोहली ने कला के माध्यम से शिक्षण को जोड़ने की अपनी अवधारणा प्रस्तुत की।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक के पास अपने विषय से इतर कोई न कोई कला, कौशल या रुचि होती है। यदि उस प्रतिभा को कक्षा शिक्षण से जोड़ा जाए तो अध्यापन अधिक प्रभावी, रोचक और जीवंत बन सकता है।
9,500 से अधिक शिक्षकों के बीच राष्ट्रीय चयन
विनायक कोहली ने बताया कि इस राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए देशभर से 9,500 से अधिक शिक्षकों ने आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी हुई। अंतिम चरण के लिए उन्हें दिल्ली आमंत्रित किया गया, जहां ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं अन्य विशेषज्ञों के समक्ष उन्होंने अपनी शिक्षण पद्धतियों का प्रस्तुतिकरण दिया।
इसी प्रस्तुतिकरण के आधार पर उन्हें भूगोल श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक चुना गया।
कोण्डागांव की संस्कृति बनी अंतरराष्ट्रीय पहचान
कोहली ने अपनी सफलता का श्रेय अकेले खुद को देने के बजाय कोण्डागांव की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय शिल्पकारों, कलाकारों और विद्यार्थियों को दिया। उन्होंने बताया कि बस्तर की मिट्टी, स्थानीय शिल्पकला और परंपराओं को विषय-ज्ञान के साथ जोड़कर उन्होंने शिक्षण को एक नया आयाम देने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि कोण्डागांव की संस्कृति और बस्तर की पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना उनके लिए गर्व का विषय है।
सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला से लेकर बस्तर आर्ट म्यूजियम तक कई नवाचार
विनायक कोहली ने अपने प्रस्तुतिकरण में पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोण्डागांव में अपनाई जा रही कई नवाचारी शिक्षण पद्धतियों की जानकारी दी। इनमें प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ की पहली सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला, बस्तर आर्ट म्यूजियम कॉर्नर, रोल-प्ले आधारित गतिविधियां, नियमित ध्यान सत्र, युवा संसद, मैपिंग गतिविधियां, मृदा नमूना संग्रहण और कला-एकीकृत शिक्षण में भरतनाट्यम का उपयोग शामिल हैं।
उन्होंने विद्यालय के अन्य शिक्षकों द्वारा अपनाई जा रही उत्कृष्ट शिक्षण पद्धतियों का भी उल्लेख किया।
मोबाइल की बढ़ती निर्भरता पर जताई चिंता
कोहली ने बच्चों में कम उम्र से ही मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक मोबाइल उपयोग बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सिद्धांतों तथा जीन पियाजे के रचनावादी दृष्टिकोण को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने हस्त-कौशल आधारित, अनुभवात्मक और खिलौना-आधारित आनंददायी शिक्षण गतिविधियों को कक्षा का हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताई।
शिक्षक का सम्मान भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा के साथ-साथ शिक्षक कल्याण और सम्मान को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षण को राष्ट्रीय सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए और शिक्षक के पेशे की गरिमा बनाए रखना शिक्षकों की भी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जब शिक्षक स्वयं सम्मानित महसूस करेगा, तभी वह अपने कार्य पर गर्व करते हुए विद्यार्थियों को अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकेगा।
जिले के सभी स्कूलों में भूगोल प्रयोगशाला बनाने के निर्देश
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने विनायक कोहली के कार्यों की सराहना की। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अविनाश भोई ने भी उनके प्रयासों की प्रशंसा की।
कलेक्टर ने जिले के सभी विद्यालयों के प्राचार्यों को अपने-अपने स्कूलों में भूगोल प्रयोगशाला स्थापित करने की दिशा में कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को जिले के सामाजिक विज्ञान, भूगोल, इतिहास एवं कला विषय के शिक्षकों के लिए कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए।
इस कार्यशाला में विनायक कोहली अपनी शिक्षण पद्धतियों एवं अनुभवों को अन्य शिक्षकों के साथ साझा करेंगे।
वन मंत्री समेत सभी सहयोगियों का जताया आभार
विनायक कोहली ने अपनी उपलब्धि पर बधाई और प्रोत्साहन के लिए वन मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अपर कलेक्टर, अधिकारियों, प्राचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति भी कृतज्ञता जताई।
उन्होंने पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोण्डागांव के प्राचार्य तथा केंद्रीय विद्यालय संगठन प्रशासन का विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि कोण्डागांव और बस्तर की शिक्षा, संस्कृति एवं प्रतिभा की उपलब्धि है।