Skip to main content

AAJ24

[state_mirror_header]

जमानत याचिकाओं को लंबित रखने से पड़ता है मौलिक अधिकारों पर असर SC को क्यों करनी पड़ी यह टिप्पणी

Aaj 24
By Aaj 24

दिल्ली: जमानत याचिकाओं को वर्षों तक लंबित रखने की अदालतों की प्रथा की निंदा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों पर निर्णय लेने में एक दिन की भी देरी नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालती है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने शुक्रवार को कहा, ‘शीर्ष अदालत ने बार-बार व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया है। हम जमानत याचिकाओं को वर्षों तक लंबित रखने की प्रथा को पसंद नहीं करते हैं।’

- Advertisement -

शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसने कहा कि उनकी जमानत याचिका पिछले साल अगस्त से इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है और मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि मामले को बिना किसी प्रभावी सुनवाई के हाई कोर्ट के सामने बार-बार स्थगित किया गया।

- Advertisement -

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि मामले की सुनवाई 11 नवंबर को हाई कोर्ट में होगी। पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा, ‘जिनके सामने यह मामला रखा गया है, उन जज से अनुरोध करते हैं कि वह उसी तारीख को मामले की सुनवाई करें और यथासंभव शीघ्रता से और किसी भी स्थिति में 11 नवंबर से दो सप्ताह के अंदर इस मामले पर निर्णय लें।’

See also  लांजीत PHC में ताला, कार में हुआ प्रसव! सूरजपुर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
Share This Article