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अनुशासनहीनता पर सूरजपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 129 दिन तक ड्यूटी से गायब आरक्षक सेवा से बाहर,

Priyanshu Ranjan

बार-बार नोटिस के बावजूद नहीं लौटा ड्यूटी पर, विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद एसपी ने लिया कड़ा फैसला, 

विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद सेवा से पृथक, ‘नो वर्क-नो पे’ के तहत 129 दिन की अवधि अवैतनिक घोषित

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सूरजपुर पुलिस ने विभागीय अनुशासन को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए 129 दिनों तक बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा को सेवा से पृथक कर दिया है। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल (भा.पु.से.) ने 31 जुलाई 2026 को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। साथ ही 25 जून 2025 से 31 अक्टूबर 2025 तक की 129 दिनों की अनुपस्थिति अवधि को ‘कार्य नहीं, वेतन नहीं’ (No Work, No Pay) के सिद्धांत के तहत अवैतनिक घोषित किया गया है।

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पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा की ड्यूटी 25 जून 2025 को बंदी पेशी के लिए लगाई गई थी, लेकिन वह उस दिन से बिना किसी सक्षम अनुमति और बिना नियमानुसार सूचना दिए लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित रहा। विभाग द्वारा उसे कई बार नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने और तत्काल ड्यूटी जॉइन करने के निर्देश दिए गए, लेकिन उसने निर्धारित समय में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और न ही नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित हुआ।

मामले में विभागीय जांच प्रारंभ की गई, जिसमें आरोप पत्र जारी कर संबंधित आरक्षक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। जांच के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों, अभियोजन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के परीक्षण में यह सामने आया कि आरक्षक ने उपचार संबंधी कुछ दस्तावेज तो प्रस्तुत किए, लेकिन लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के दौरान विभाग को नियमानुसार कोई लिखित सूचना अथवा अवकाश स्वीकृति के लिए आवेदन नहीं दिया। जांच अधिकारी ने इसे पुलिस विभाग के अनुशासन का गंभीर उल्लंघन और कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही माना।

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जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित आरक्षक का पूर्व सेवा रिकॉर्ड भी संतोषजनक नहीं था। सेवा अभिलेखों के अनुसार नियुक्ति के बाद से वह कई बार अनाधिकृत अनुपस्थिति के मामलों में विभागीय कार्रवाई का सामना कर चुका था। उसके विरुद्ध पूर्व में अवैतनिक अवधि घोषित करने, वेतनवृद्धि रोकने सहित कई छोटी-बड़ी विभागीय सजाएं दी जा चुकी थीं। इसके बावजूद उसके व्यवहार और कार्यशैली में अपेक्षित सुधार नहीं आया। विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर यह भी माना गया कि भविष्य में उसके एक अनुशासित एवं जिम्मेदार पुलिस कर्मचारी के रूप में कार्य करने की संभावना अत्यंत कम है।

इन सभी तथ्यों, साक्ष्यों एवं सेवा अभिलेखों के परीक्षण के बाद पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल ने विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए जाने पर आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा को सेवा से पृथक करने का आदेश जारी किया।

पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल ने कहा कि पुलिस विभाग एक अनुशासित बल है, जहां प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी से कर्तव्यनिष्ठा, जवाबदेही और अनुशासन की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनाधिकृत अनुपस्थिति, विभागीय नियमों की अवहेलना और कर्तव्य के प्रति लापरवाही किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिला पुलिस सूरजपुर में भविष्य में भी अनुशासनहीनता के मामलों में निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि पुलिस बल की कार्यकुशलता, जवाबदेही और आमजन का विश्वास कायम रहे।

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