बांसापारा में निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने तकनीकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की
सूरजपुर। विकासखंड भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत बांसापारा में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से करीब 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीमेंट कंक्रीट (सीसी) सड़क महज करीब 17 माह में ही बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। दुर्गा पंडाल (मंदिर) कुम्हारपारा पहुंच मार्ग पर बनाई गई इस सड़क की ऊपरी परत कई स्थानों पर उखड़ गई है और गिट्टियां बाहर निकलकर सड़क पर बिखरी पड़ी हैं।
सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता और कार्य के मूल्यांकन पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि लाखों रुपये की लागत से बनाई गई सड़क से लंबे समय तक बेहतर आवागमन सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क की सतह खराब होने लगी।
19.99 लाख रुपये का मूल्यांकन, 17 माह में ही उखड़ने लगी सतह
उपलब्ध सूचना पट्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में डीएमएफ मद से इस सड़क निर्माण कार्य के लिए 20 लाख रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत बांसापारा को बनाया गया था। कार्य की शुरुआत 4 नवंबर 2024 को हुई और इसे 2 अप्रैल 2025 को पूर्ण दर्ज किया गया।
दस्तावेज में कार्य का कुल मूल्यांकन 19 लाख 99 हजार 535 रुपये दर्ज है। निर्माण पूर्ण होने के बाद करीब 17 माह के भीतर ही सड़क की ऊपरी परत जगह-जगह से उखड़ने लगी है। सड़क पर गिट्टियां बाहर आने से निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
निर्माण के दौरान मानकों का पालन हुआ या नहीं, जांच से होगा स्पष्ट
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता और सीमेंट-गिट्टी के निर्धारित अनुपात का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया, जिसके चलते सड़क की ऊपरी परत अपेक्षाकृत कम समय में कमजोर होकर उखड़ने लगी।
हालांकि, ग्रामीणों के इन आरोपों की वास्तविकता तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। इसके लिए सड़क में इस्तेमाल सामग्री, कंक्रीट की गुणवत्ता, सीमेंट और एग्रीगेट के अनुपात, सड़क की निर्धारित मोटाई तथा निर्माण प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी।
पहली-दूसरी बारिश के बाद ही सामने आई कमजोरी?
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण के बाद से ही इसकी मजबूती को लेकर सवाल उठने लगे थे। बारिश के बाद सड़क की ऊपरी सतह कई जगहों से खराब होने लगी और अब स्थिति यह है कि गिट्टियां खुलकर सड़क पर दिखाई दे रही हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मापदंडों का पालन हुआ था? यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया गया था तो इतनी कम अवधि में सड़क की ऊपरी परत के उखड़ने की वजह क्या है? इन सवालों का जवाब तकनीकी परीक्षण और संबंधित अभिलेखों की जांच से ही सामने आ सकता है।
बाहर निकली गिट्टियों से राहगीरों को परेशानी
सड़क की ऊपरी परत उखड़ने के कारण कई स्थानों पर नुकीली गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। इससे दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी हो रही है और फिसलने या दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। पैदल चलने वालों को भी असमतल सड़क के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क का निर्माण आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया था, वही अब खराब स्थिति के कारण परेशानी का कारण बन रही है।
तकनीकी जांच के साथ तय हो जवाबदेही
ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में सड़क की मोटाई, निर्माण सामग्री, सीमेंट-गिट्टी का अनुपात, निर्माण प्रक्रिया और कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही यह भी जांच की जानी चाहिए कि कार्य पूर्ण होने के बाद करीब 19.99 लाख रुपये का मूल्यांकन किन मानकों के आधार पर किया गया और निर्माण पूर्ण होने के लगभग 17 माह बाद सड़क की यह स्थिति क्यों बनी।
ग्रामीणों की मांग है कि यदि तकनीकी जांच में निर्माण कार्य में कमी या निर्धारित मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी के साथ गुणवत्ता निगरानी और मूल्यांकन से जुड़े जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जाए।
करीब 20 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क का इतनी कम अवधि में खराब होना अब केवल स्थानीय आवागमन की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह डीएमएफ मद से कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और मूल्यांकन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।