न्यायालय में लंबित प्रकरण वापस लेने का दबाव बनाने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप; कोतवाली पुलिस ने बीएनएस की धाराओं में शुरू की जांच,
अंबिकापुर। झारखंड के धनबाद स्थित वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले 13 वर्षों तक अंबिकापुर में कथित रूप से फरारी काटने और हालिया पुलिस कार्रवाई के दौरान फरार होने का मामला सामने आया, फिर उसे संरक्षण देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और अब स्थानीय व्यवसायी को न्यायालय में लंबित मामला वापस लेने के लिए कथित रूप से धमकाने के आरोप में शब्बीर आलम, उसके बेटे कमरान आलम समेत नौ लोगों के खिलाफ कोतवाली थाना अंबिकापुर में एक और अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार खरसिया नाका निवासी व्यवसायी अबू मोहम्मद की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शब्बीर आलम, कमरान आलम, जिसान आलम, इरसाद आलम, दिलसाद आलम, सलमान, मोहम्मद साद, खुशबास तथा नौसान ने 3-4 जनवरी और 17 मार्च 2026 को उसका पीछा किया, गाली-गलौज की और न्यायालय में विचाराधीन पुराने प्रकरण को वापस लेने का दबाव बनाया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इनकार करने पर जान से मारने की धमकी दी गई, जिसके बाद से उसका परिवार भय के माहौल में रह रहा है।
कोतवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पहले से कई मामलों में वांछित
शब्बीर आलम पहले से ही झारखंड पुलिस के लिए लंबे समय से वांछित आरोपी बताया जाता है। उस पर वर्ष 2001 के धनबाद के चर्चित डबल मर्डर मामले में आरोपी होने का आरोप है। वर्ष 2013 में न्यायालय से फरार होने के बाद उसके अंबिकापुर में रहने की बात सामने आई थी। वर्ष 2018 में झारखंड हाईकोर्ट द्वारा उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि इस संबंध में अंतिम कानूनी स्थिति न्यायालयीन अभिलेखों के अधीन है।
1 जुलाई की कार्रवाई के बाद बढ़ी जांच
बीती 1 जुलाई को धनबाद पुलिस शब्बीर आलम को गिरफ्तार करने अंबिकापुर पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान हुई अफरा-तफरी के बीच उसके फरार होने का मामला सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे संरक्षण देने और फरार होने में कथित सहयोग करने वालों के खिलाफ भी अलग से एफआईआर दर्ज की। मामले में परिवहन व्यवसाय से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
स्थानीय नेटवर्क की भी हो रही जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार शब्बीर आलम के स्थानीय नेटवर्क, आर्थिक गतिविधियों और कथित सहयोगियों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फरारी के दौरान उसे किन-किन लोगों का सहयोग मिला और उसके संपर्क किन व्यक्तियों से जुड़े रहे। हाल के मामलों के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।
जांच पूरी होने के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
व्यवसायी द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है। वहीं आरोपियों का पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।