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सीएसपीडीसीएल के ₹1.83 करोड़ फर्जी भुगतान मामले में हाईकोर्ट सख्त, पुलिस को 4 सप्ताह में जांच पूरी कर चालान पेश करने का आदेश,

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर बिजली कंपनी में कथित गबन और फर्जी भुगतान प्रकरण पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, एक वर्ष बाद भी कार्रवाई अधूरी रहने पर पुलिस को तय समयसीमा में विवेचना पूरी करने के निर्देश,

अंबिकापुर | 31 जुलाई 2026।

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छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) अंबिकापुर में करोड़ों रुपये के कथित गबन और फर्जी भुगतान मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि अपराध क्रमांक 282/2025 की विवेचना चार सप्ताह के भीतर पूरी कर अंतिम प्रतिवेदन (चालान) सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।

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यह मामला थाना कोतवाली अंबिकापुर में दर्ज अपराध क्रमांक 282/2025 से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पूर्व दर्ज भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 409, 419, 420, 467, 468 एवं 471 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। यह एफआईआर अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. डी.के. सोनी की पहल पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) के आदेश के बाद दर्ज हुई थी।

जांच में सामने आईं गंभीर वित्तीय अनियमितताएं

कार्यपालन निदेशक (अंचल), अंबिकापुर की 24 फरवरी 2023 की जांच रिपोर्ट में मेसर्स आर.के. एसोसिएट्स, मैट्रिक्स सर्विसेज और गुरुकृपा ग्रुप से जुड़े भुगतान में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ईपीएफ, बोनस और ईएसआईसी मद में भुगतान किए गए तथा कई मामलों में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति से अधिक राशि जारी कर दी गई।

जांच में यह भी पाया गया कि कई भुगतान बिना ईपीएफ और ईएसआईसी दस्तावेजों के सत्यापन के पारित किए गए। कुछ मामलों में ईपीएफ चालानों में कथित रूप से छेड़छाड़ कर उन्हें भुगतान फाइलों के साथ संलग्न किया गया, जिसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने सत्यापन किए बिना भुगतान स्वीकृत कर दिया।

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करीब ₹1.83 करोड़ के अधिक भुगतान का आरोप

जांच प्रतिवेदन के अनुसार आर.के. एसोसिएट्स को लगभग 20.86 लाख रुपये, जबकि मैट्रिक्स सर्विसेज को लगभग 1.62 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। तीनों मामलों में कुल 1,82,86,907 रुपये के अधिक भुगतान का उल्लेख किया गया है। जांच रिपोर्ट में अधिकारियों एवं ठेकेदारों की कथित मिलीभगत की आशंका भी व्यक्त की गई है।

सीजेएम के आदेश पर दर्ज हुई थी एफआईआर

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) ने प्रथम दृष्टया अपराध बनना पाए जाने पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का निर्देश दिया था। इसके बाद थाना कोतवाली अंबिकापुर में मामला दर्ज किया गया।

एक वर्ष बाद भी नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई

याचिका के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं निरस्त होने के बावजूद पुलिस ने न तो आरोपियों की गिरफ्तारी की और न ही न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। इसके बाद अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. डी.के. सोनी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में डब्ल्यूपीसीआर क्रमांक 357/2026 दायर की।

हाईकोर्ट ने तय की समयसीमा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने 3 जुलाई 2026 को पारित आदेश में पुलिस को निर्देश दिया कि अपराध क्रमांक 282/2025 की विवेचना शीघ्र पूरी कर चार सप्ताह के भीतर अंतिम प्रतिवेदन (चालान) सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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