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राजपुर जनपद क्षेत्र में मनरेगा के तहत बने चेक डेमो में अब जांच टीमों पर भी उठ रहे है सवाल,

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर । जिले के समरी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत राजपुर जनपद क्षेत्र में मनरेगा के तहत बनाए गए चेक डैमों की गुणवत्ता और मजदूरी भुगतान को लेकर उठे सवाल अब जांच टीमों पर भी खड़े होने लगे हैं। ग्रामीणों की शिकायत और मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद जिला व प्रदेश स्तर पर जांच टीम गठित की गई थी, लेकिन अब उपलब्धियों से जुड़ी खबरों के प्रकाशन के बाद जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

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मार्च में जारी हुआ था जांच आदेश

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     ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग बलरामपुर-रामानुजगंज के कार्यपालन अभियंता द्वारा 12 मार्च 2026 को पत्र क्रमांक 258 जारी कर राजपुर जनपद क्षेत्र के विभिन्न ग्राम पंचायतों में मनरेगा से बने चेक डैमों की गुणवत्ता जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के दायरे में चंद्रगढ़, सिंचोरा, लडुआ, पतरापारा, चिलमा, बड़ी चलगली, कोडू, बदौली, कारवां, पकराड़ी, डीगनगर, कुंदी खुर्द, पहाड़खडूवा, खोखनिया समेत कई गांव शामिल थे।

जिला स्तर पर बनाई गई थी टीम : 

      जिला स्तर पर गठित टीम में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के अनुविभागीय अधिकारी सुदर्शन उरांव को अध्यक्ष बनाया गया था। साथ ही कुसमी के अनुविभागीय अधिकारी बसिल मिंज, उप अभियंता तनुज अंबष्ट और राजपुर के उप अभियंता राजेंद्र दुबे को सदस्य बनाया गया था। इधर प्रदेश स्तर से भी अलग जांच टीम गठित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

उपलब्धि वाली खबरों से बढ़े सवाल :

     मामले में चर्चा तब और तेज हो गई, जब चंद्रगढ़ के बरौना नाला में बने चेक डैम को किसानों के लिए लाभकारी बताते हुए कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्धि संबंधी खबरें प्रकाशित हुईं। खबरों में दावा किया गया कि इससे किसानों को लाभ मिलेगा और लाभार्थियों के नाम भी प्रकाशित किए गए। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब जांच प्रक्रिया जारी थी, तब उपलब्धियों का प्रचार किस आधार पर किया गया? क्या जांच पूरी हो चुकी थी या फिर विभागीय छवि सुधारने के लिए यह प्रयास किया गया?

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पहले मशीन से काम कराने के आरोप लगे थे : 

     स्थानीय ग्रामीणों और पहले प्रकाशित खबरों में आरोप लगाए गए थे कि मनरेगा कार्य में मजदूरों की जगह मशीनों का उपयोग किया गया। साथ ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की गई थी।

अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका…

     मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जांच टीम अध्यक्ष सुदर्शन उरांव तथा कार्यपालन अभियंता सच्चिदानंद कांत से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।

अब प्रशासन से जवाब की अपेक्षा

      जिले में चर्चा है कि क्या प्रशासन बरौना नाला में बने चेक डैम की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट है? और यदि जांच पूरी हो चुकी है तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों और आमजन की नजर अब जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी है।

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