अंबिकापुर । राम मंदिर रोड स्थित भीषण अग्निकांड के बाद शहर में अब सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक कार्रवाई और घनी आबादी के बीच संचालित खतरनाक कारोबारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर प्रशासन हादसे की जांच में जुटा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम द्वारा आग प्रभावित भवन को असुरक्षित घोषित कर हटाने संबंधी नोटिस जारी किए जाने के बाद लोगों ने शहरभर के संवेदनशील स्थानों पर कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि एक प्रतिष्ठान में लगी आग ने पूरे इलाके को दहला दिया, तो उन स्थानों पर संभावित खतरा कितना बड़ा हो सकता है, जहां प्रतिदिन पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर, लकड़ी, प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री का भंडारण होता है।
निगम नोटिस के बाद उठे सवाल
नगर निगम द्वारा जारी नोटिस में आग प्रभावित भवन को जर्जर, असुरक्षित एवं अनुपयुक्त बताते हुए हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि जब हादसे के बाद कार्रवाई हो सकती है, तो पहले से चिन्हित जोखिम वाले स्थानों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। लोगों का कहना है कि शहर में कई जगह घनी आबादी के बीच ऐसे प्रतिष्ठान वर्षों से संचालित हो रहे हैं, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
क्या प्रशासन बड़ी घटना
का इंतजार कर रहा है?
नागरिकों ने सवाल उठाया है कि क्या हर बार प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही सक्रिय होगा? क्या पहले चेतावनी, निरीक्षण और नियमन की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए? लोगों का कहना है कि हर घटना के बाद जांच समिति, नोटिस और बयान सामने आते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान दिखाई नहीं देता।
शहरव्यापी सर्वे और सुरक्षा जांच की मांग :
अग्निकांड के बाद शहर वासियों ने मांग की है कि प्रशासन पूरे शहर का सर्वे कर यह चिन्हित करे कि कौन-कौन से संवेदनशील प्रतिष्ठान घनी आबादी के बीच संचालित हो रहे हैं। साथ ही—
अग्निशमन उपकरणों की
उपलब्धता जांची जाए
– लाइसेंस और अनुमति की समीक्षा हो।
– सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
– जोखिम वाले प्रतिष्ठानों को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।
– आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाए।
हादसे के बाद नहीं, पहले जागे सिस्टम
स्थानीय लोगों का कहना है कि जरूरत हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसे से पहले रोकथाम की है। यदि समय रहते जोखिम वाले स्थानों की पहचान कर नियमन किया जाए, तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
शहर अब जवाब चाहता है…
अम्बिकापुर की जनता अब पूछ रही है—
– घनी आबादी के बीच खतरनाक कारोबारों को अनुमति किस आधार पर मिली?
– सुरक्षा मानकों की अंतिम जांच कब हुई थी?
– क्या प्रशासन बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?
– क्या अग्निकांड के बाद शहरभर में व्यापक सुरक्षा अभियान चलेगा?
राम मंदिर रोड हादसे ने सिर्फ एक दुकान की आग नहीं दिखाई, बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
पेट्रोल पंप और गैस गोदाम सबसे संवेदनशील
विशेषज्ञों के अनुसार रिहायशी इलाकों के बीच संचालित पेट्रोल पंप और गैस गोदाम अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में आते हैं। यहां छोटी सी चूक, रिसाव, शॉर्ट सर्किट या आगजनी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर संकरी सड़कें, भारी भीड़ और आसपास मकान होने के कारण आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य भी बाधित हो सकता है।
लकड़ी मील, प्लास्टिक गोदाम और कबाड़ केंद्र भी खतरे में…
शहर के भीतर लकड़ी मील, प्लास्टिक गोदाम, कबाड़ केंद्र और अन्य ज्वलनशील व्यवसाय भी संचालित हैं। ऐसे स्थानों पर आग लगने की स्थिति में लपटें तेजी से फैल सकती हैं और आसपास के घरों व दुकानों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। नागरिकों ने इन प्रतिष्ठानों की समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की मांग की है।