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अंबिकापुर में सनसनीखेज घोटाला: 6.25 एकड़ रिंग बांध तालाब सिमटकर मात्र 57 डिसमिल, फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्रों से आजाद इराकी के नाम कब्जा! BJP नेता कैलाश मिश्रा का बड़ा खुलासा,,,

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर के प्रसिद्ध रिंग बांध तालाब को पाटकर कब्जा करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फर्जी दस्तावेजों और दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण-पत्रों का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से तत्काल जांच, नामांतरण रद्द करने और एफआईआर की मांग की है।

अंबिकापुर। नगर निगम क्षेत्र के रिंग रोड स्थित ऐतिहासिक रिंग बांध तालाब को बड़े पैमाने पर पाटकर कब्जा किए जाने का मामला अब सनसनीखेज मोड़ ले चुका है। जल भराव और निस्तार भूमि के रूप में मशहूर इस तालाब पर अतिक्रमण और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी के आरोपों के बीच भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

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मिश्रा ने आरोप लगाया कि आजाद इराकी ने स्वयं को भूमि स्वामी बताते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तालाब की जमीन का नामांतरण करा लिया और बड़े हिस्से को मिट्टी डालकर पाट दिया गया। उन्होंने कलेक्टर सरगुजा से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज करने, संदिग्ध नामांतरण निरस्त करने और तालाब को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की है।

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6.25 एकड़ से सिमटकर मात्र 57 डिसमिल रह गया तालाब

कैलाश मिश्रा के अनुसार, मूल रूप से करीब 6.25 एकड़ निस्तार भूमि वाले रिंग बांध तालाब का क्षेत्रफल अब घटकर मात्र 57 डिसमिल रह गया है। आरोप है कि जनवरी 2026 में बची हुई भूमि की भी रजिस्ट्री कर दी गई और रातोंरात जेसीबी-ट्रैक्टरों से मिट्टी डालकर बड़े पैमाने पर तालाब को पाट दिया गया। इससे तालाब की जल संरक्षण क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अतिक्रमण जारी रहा तो शहर में जल संकट, भूजल स्तर गिरना और जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है।

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खसरा नंबर 3714 पर गंभीर सवाल

प्रेस वार्ता में मिश्रा ने खसरा नंबर 3714 का विशेष उल्लेख करते हुए पूछा कि जो भूमि पहले कृष्ण बहादुर सिंह वल्द राम सिंह के नाम पर दर्ज थी, वह वर्ष 1982-83 में अचानक जयलाल के नाम पर कैसे दर्ज हो गई? इस परिवर्तन की कभी कोई गंभीर जांच नहीं हुई।

सबसे बड़ा खुलासा: एक व्यक्ति की दो मौत? फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्रों का खेल

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्रों से जुड़ा है। कैलाश मिश्रा ने बताया कि पहले नामांतरण में जयलाल का मृत्यु प्रमाण-पत्र लगाया गया, जिसमें मृत्यु तिथि 23 अप्रैल 1976 (स्थान: होली क्रॉस हॉस्पिटल, अंबिकापुर) दर्ज है और यह प्रमाण-पत्र 24 फरवरी 2018 को पंजीकृत हुआ।IMG 20260427 WA0027

दूसरे नामांतरण में फिर जयलाल पिता बोधन का नया मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें मृत्यु तिथि 12 अप्रैल 1963 (स्थान: अमलभित्ति, लखनपुर) बताई गई और यह प्रमाण-पत्र 1 सितंबर 2025 को जारी किया गया।

मिश्रा ने सवाल उठाया— “एक ही व्यक्ति की मौत दो अलग-अलग तारीखों और दो अलग-अलग स्थानों पर कैसे हो सकती है?” उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला बताया।

आजाद इराकी के नाम नामांतरण तत्काल निरस्त हो

भाजपा नेता ने इन संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर आजाद इराकी के पक्ष में किए गए नामांतरण को तुरंत निरस्त करने की मांग की है।

शहर के जल संसाधनों पर खतरा

रिंग बांध तालाब लंबे समय से अंबिकापुर का प्रमुख जल संरक्षण क्षेत्र रहा है। यदि तालाबों और निस्तार भूमि पर इसी तरह कब्जे होते रहे तो शहर में पर्यावरणीय असंतुलन, भूजल संकट और बाढ़ जैसी समस्याएं बढ़ेंगी।

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अब प्रशासन पर सबकी नजर

मामला सार्वजनिक होने के बाद शहरवासियों की नजर जिला प्रशासन पर टिकी हुई है। मुख्य सवाल हैं:

फर्जी दस्तावेजों की जांच होगी?

नामांतरण निरस्त होगा?

तालाब को मूल रूप में बहाल किया जाएगा?

दोषियों पर एफआईआर दर्ज होगी?

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