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गांधी नगर पुलिस ने साइबर क्राइम में उपयोग हो रहे म्यूल एकाउंट के मालिक को गिरफ्तार कर भेजा जेल,

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर । साइबर अपराधियों को बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले म्यूल अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ सरगुजा पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। थाना गांधीनगर पुलिस ने ऐसे ही एक मामले में नीरज गुप्ता नामक युवक को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने महज 3 हजार रुपए प्रति खाते के लालच में अपने तीन बैंक खाते और अपने भाई का एक बैंक खाता दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया था। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया।
सरगुजा पुलिस के अनुसार, डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन में जिले भर में म्यूल अकाउंट, फर्जी सिम कार्ड, पीओएस मशीनों और साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत थाना गांधीनगर में दर्ज अपराध क्रमांक 151/2026 की विवेचना के दौरान यह गिरफ्तारी की गई।

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मुखबिर की सूचना से खुला था पूरा नेटवर्क :

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पुलिस को 19 मार्च 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बनारस रोड स्थित एसबीआई बैंक शाखा के समीप एक किराए के मकान में रहकर राहुल गुप्ता नामक युवक अवैध गतिविधियों का संचालन कर रहा है। सूचना में बताया गया था कि वह युवाओं को कुछ हजार रुपए का लालच देकर उनके नाम से नए सिम कार्ड खरीदवाता था और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद खाते से संबंधित पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और मोबाइल नंबर अपने कब्जे में लेकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था।
इन खातों का उपयोग ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल फ्रॉड और अन्य आर्थिक अपराधों से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

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मुख्य आरोपी के कब्जे से मिलीं कई बैंक पासबुक :

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी राहुल गुप्ता को गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे से कई बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए। इनमें नीरज गुप्ता के नाम से संचालित भारतीय स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक के खातों की पासबुक भी शामिल थीं। पुलिस जांच में इन खातों में असामान्य रूप से बड़ी राशि का लेनदेन पाया गया। साथ ही यह भी सामने आया कि इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी से जुड़ी रकम का ट्रांसफर किया गया था। इसके बाद पुलिस ने संबंधित खाता धारक नीरज गुप्ता को पूछताछ के लिए तलब किया।

पूछताछ में कबूला खाते बेचने का सच :

पुलिस पूछताछ के दौरान नीरज गुप्ता ने स्वीकार किया कि उसने अपने तीन बैंक खाते और अपने भाई पंकज गुप्ता का एक बैंक खाता आरोपी विकास किर्तनिया को उपलब्ध कराया था। इसके बदले उसे प्रति खाते 3 हजार रुपए दिए गए थे। जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने आर्थिक लाभ के लिए अपने बैंक खातों का नियंत्रण दूसरे लोगों को सौंप दिया था, जिसका उपयोग बाद में साइबर अपराधों में किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

अब तक 11 आरोपी पहुंच चुके हैं जेल

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में मुख्य आरोपी राहुल गुप्ता सहित अब तक कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच अभी भी जारी है और संभावना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

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क्या होता है म्यूल अकाउंट?

साइबर अपराध की दुनिया में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिन्हें उनके वास्तविक धारक कुछ पैसों के लालच में दूसरे व्यक्तियों को उपयोग के लिए दे देते हैं। साइबर ठग इन्हीं खातों का उपयोग ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और अपनी पहचान छिपाने के लिए करते हैं। कई बार खाता धारक यह समझते हैं कि वे केवल अपना खाता किराए पर दे रहे हैं, लेकिन कानून की नजर में वे भी अपराध में सहभागी माने जाते हैं।

लोगों से पुलिस की अपील

सरगुजा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में किया गया ऐसा कार्य उन्हें गंभीर कानूनी कार्रवाई और जेल तक पहुंचा सकता है।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, आरक्षक अरविंद उपाध्याय, अमृत सिंह, विकास सिंह तथा ऋषभ सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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