अंबिकापुर। साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से अंबिकापुर में साइबर जागृति अभियान चलाया गया। अभियान के तहत राजमोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय और नगर पालिका हायर सेकेंडरी स्कूल में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें करीब 500 छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
डीआईजी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार अग्रवाल के निर्देश तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं साइबर सेल के नोडल अधिकारी रितेश चौधरी के मार्गदर्शन में जिले के स्कूल, कॉलेज एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में प्रथम सप्ताह साइबर जागृति अभियान आयोजित किया जा रहा है।
OTP से डिजिटल अरेस्ट तक, साइबर ठगी के नए तरीकों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेष रूप से OTP फ्रॉड, UPI फ्रॉड, QR Code फ्रॉड, फर्जी लिंक, APK फाइल, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, सोशल मीडिया फ्रॉड, फर्जी प्रोफाइल, अनजान वीडियो कॉल, सेक्सटॉर्शन और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों से बचने के तरीके समझाए गए।
पुलिस टीम ने बताया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को झांसे में लेकर बैंक खाते, सोशल मीडिया अकाउंट या निजी जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने या उसके भेजे लिंक को खोलने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।
OTP, PIN और बैंक की जानकारी किसी से साझा न करें
छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अनजान APK फाइल डाउनलोड करने और किसी के कहने पर QR Code स्कैन करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करने की सलाह दी गई। सोशल मीडिया पर निजी फोटो, वीडियो और व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय भी सावधानी बरतने की अपील की गई।
ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत
साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने के महत्व पर भी छात्र-छात्राओं को जानकारी दी गई। उन्हें राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 और cybercrime.gov.in के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई गई।
पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने के बाद जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, ठगी गई राशि को रोकने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। इसलिए घटना के बाद समय गंवाए बिना तत्काल शिकायत करना जरूरी है।
‘जागरूकता की एक Selfie’ से दिया साइबर सुरक्षा का संदेश
अभियान के तहत ‘जागरूकता की एक Selfie’ गतिविधि भी आयोजित की गई। छात्र-छात्राओं को जागरूकता QR Code की जानकारी दी गई और साइबर जागरूकता अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
छात्राओं ने QR Code के साथ Selfie लेकर साइबर सुरक्षा का संदेश साझा किया और अपने परिवार तथा समाज के अन्य लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाने के लिए जागरूक करने का संकल्प लिया।
पुलिस और साइबर वॉलंटियर टीम ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. एजन टोप्पो, प्राचार्य विनोद सिंह, नवा विहान से अजय तिवारी, डॉ. विश्वासी एक्का, प्रोफेसर डॉ. सृष्टि शैफाली मिंज, सहायक प्राध्यापक, थाना गांधीनगर से सउनि अभय तिवारी, विवेक चंद्राकर सहित पुलिस टीम मौजूद रही।
महिला थाना से महिला प्रधान आरक्षक एंजेला मिंज, प्रधान आरक्षक राजेश्वर खलखो, आरक्षक राहुल और महिला आरक्षक सविता मरावी सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने भी सहभागिता की।
वहीं पुलिस मितान एवं साइबर वॉलंटियर टीम से अतुल गुप्ता, बसंत श्रीवास्तव, आर्यन पाण्डेय, विकेश राजवाड़े, विभाश्री सिंह और राजकुमार ने सक्रिय सहभागिता निभाई और छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
सवाल-जवाब के जरिए दूर की साइबर अपराधों से जुड़ी शंकाएं
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे। पुलिस एवं साइबर जागरूकता टीम ने सवालों के जवाब देते हुए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में समझाया।
करीब 500 छात्र-छात्राओं की सहभागिता वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को साइबर अपराधों के प्रति सजग करना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित करना रहा।
अभियान के अंत में छात्र-छात्राओं ने स्वयं साइबर अपराधों से सतर्क रहने तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी ऑनलाइन ठगी एवं साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।



