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स्वतंत्रता दिवस विशेष: जीवंत हो उठा छत्तीसगढ़ के अनगिनत वीर जनजातीय पुरखों का अमर स्वाभिमान,

Priyanshu Ranjan

रायपुर, 17 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस केवल आजादी का उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि उन अनगिनत वीरों के बलिदान को स्मरण करने का दिन भी है, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। छत्तीसगढ़ की धरती भी ऐसे जनजातीय वीरों की शौर्यगाथाओं से समृद्ध रही है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया।

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नवा रायपुर अटल नगर में स्थित ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ इसी गौरवशाली इतिहास को वर्तमान पीढ़ी के सामने जीवंत करता है। राज्योत्सव की रजत जयंती के अवसर पर 1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों के संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

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पत्थरों की इमारत नहीं, इतिहास की जीवंत धड़कन

करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह संग्रहालय प्रदेश में जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के शौर्य को समर्पित एक प्रमुख स्मारक है। जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में स्थापित संग्रहालय को 14 से 16 भव्य गैलरियों में विकसित किया गया है, जहां करीब 650 से अधिक जीवंत मूर्तिशिल्प के माध्यम से छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत को प्रस्तुत किया गया है।

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इन गैलरियों में 18वीं और 19वीं शताब्दी के उन जनजातीय विद्रोहों की गाथाएं देखने को मिलती हैं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन की नींव को चुनौती दी थी।

हल्बा से भूमकाल तक, शौर्य की लंबी गाथा

संग्रहालय में हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह और सोनाखान विद्रोह सहित अनेक ऐतिहासिक संघर्षों को प्रदर्शित किया गया है।

इसके साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह के लिए भी अलग-अलग विशेष गैलरियां बनाई गई हैं।

सोनाखान के अमर शहीद वीर नारायण सिंह का संघर्ष इस पूरे इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। 1857 के विद्रोह के दौर में सोनाखान की धरती से अंग्रेजी शासन के खिलाफ उठी उनकी आवाज आज भी छत्तीसगढ़ के जनमानस में स्वाभिमान और देशभक्ति का प्रतीक है।

तकनीक के जरिए इतिहास को महसूस करने का अनुभव

यह संग्रहालय केवल मूर्तियों और ऐतिहासिक घटनाओं का प्रदर्शन नहीं करता, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से इतिहास को जीवंत अनुभव में बदलता है। VFX तकनीक, प्रोजेक्शन वर्क और डिजिटल मीडिया के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि आगंतुक उन्हें केवल देखते नहीं, बल्कि उस दौर की परिस्थितियों को महसूस भी कर पाते हैं।

गैलरियों में डिजिटल बोर्ड लगाए गए हैं। आगंतुक मोबाइल से QR कोड स्कैन कर संबंधित विद्रोह और ऐतिहासिक घटनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मॉनिटर और माइक्रोफोन के माध्यम से भी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा आगंतुकों के मार्गदर्शन के लिए प्रशिक्षित गाइड की व्यवस्था की गई है।

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पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं

संग्रहालय में इतिहास और तकनीक के साथ आगंतुकों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यहां शुद्ध पेयजल, पार्किंग, CCTV सुरक्षा, प्राथमिक उपचार केंद्र और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। शिशुवती महिलाओं की सुविधा के लिए विशेष शिशु देखभाल कक्ष भी बनाया गया है।

दस महीने में ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने देखा संग्रहालय

उद्घाटन के बाद से संग्रहालय देश-विदेश के पर्यटकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार छुट्टियों के दौरान प्रतिदिन करीब चार से पांच हजार और सामान्य दिनों में एक से दो हजार दर्शक यहां पहुंच रहे हैं।

महज दस महीनों में 2.50 लाख से अधिक लोग संग्रहालय का अवलोकन कर चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मैरीकॉम सहित विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, सेना के जवान और विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय विरासत की सराहना कर चुके हैं।

स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी

संग्रहालय ने पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। गाइड, पर्यटन से जुड़ी सेवाओं और अन्य गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व, विभागीय मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन और प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के प्रशासनिक नेतृत्व में विकसित यह स्मारक छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र

‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस ही सबसे बड़ी शक्ति है।

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छत्तीसगढ़ के जनजातीय वीरों का संघर्ष केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिए गए अदम्य बलिदान की विरासत है। यह संग्रहालय उसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान को सम्मानपूर्वक सामने लाने का जीवंत माध्यम बन रहा है।

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