मरीज से 1.60 लाख रुपये नकद लेने और आयुष्मान योजना से भी भुगतान लेने का आरोप, पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर शुरू की जांच
अंबिकापुर, 9 जुलाई। शहर के गुदरी चौक स्थित लक्ष्मी नारायण अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। अस्पताल संचालक के खिलाफ आयुष्मान भारत योजना के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मरीज के परिजनों से आयुष्मान कार्ड ‘ब्लॉक’ होने का हवाला देकर नकद राशि ली गई, जबकि बाद में अस्पताल ने उसी मरीज के उपचार का भुगतान आयुष्मान भारत योजना से भी प्राप्त कर लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
आयुष्मान कार्ड ब्लॉक बताकर 1.60 लाख रुपये नकद लेने का आरोप,
अंबिकापुर के लक्ष्मी नारायण अस्पताल पर आयुष्मान योजना में कथित धोखाधड़ी का केस, पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार बलरामपुर जिले के ग्राम गिरवानी निवासी विवेक जायसवाल ने बताया कि उन्होंने 17 अप्रैल 2026 को अपने बड़े पिता राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को पेट दर्द की शिकायत पर लक्ष्मी नारायण अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत होने की बात कही, लेकिन बाद में कार्ड ‘ब्लॉक’ होने का हवाला देकर 1.60 लाख रुपये नकद जमा करा लिए।
शिकायतकर्ता का दावा है कि बाद में जानकारी मिली कि अस्पताल ने उसी उपचार के लिए आयुष्मान भारत योजना से 1,50,460 रुपये का भुगतान भी प्राप्त किया। साथ ही नकद जमा की गई राशि का विधिवत बिल उपलब्ध नहीं कराया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की है।
पहले भी कई मामलों में उठ चुके हैं सवाल
अस्पताल को लेकर पूर्व में भी भवन अनुमति, नर्सिंग होम नियमों के पालन, फायर सेफ्टी, पार्किंग व्यवस्था, पैथोलॉजी संचालन, चिकित्सकों की उपलब्धता और मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही होगी।
नगर निगम की जांच रिपोर्ट का इंतजार
आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता डॉ. डी. के. सोनी की शिकायत पर नगर निगम ने मार्च 2026 में जांच समिति गठित की थी। समिति को भवन अनुमति, निर्माण और संचालन संबंधी तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से कई सवाल उठ रहे हैं।
जनहित से जुड़ा मामला, निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामला सीधे गरीब मरीजों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ा है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन को सभी आरोपों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो अस्पताल प्रबंधन का पक्ष भी सामने आना चाहिए, जबकि अनियमितताएं पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।




