सोनपुर सहकारी समिति के प्रकरण में चेक की लिखावट, अंगूठे के निशान और बैंक भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल
सूरजपुर। जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, सोनपुर से जुड़े एक कथित केसीसी ऋण प्रकरण में मृत किसान के नाम पर ऋण और नकद निकासी की प्रविष्टियां सामने आने के बाद जांच की मांग उठ रही है। शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत मृत्यु प्रमाणपत्र के अनुसार कृषक स्वर्गीय हरिप्रसाद की मृत्यु 10 मई 2021 को हुई थी। वहीं, उपलब्ध बैंक विवरण में इसके बाद भी ऋण संबंधी राशि जमा होने और नकद निकासी की प्रविष्टियां दर्ज होने का दावा किया गया है।
मृत्यु के बाद ऋण और निकासी की प्रविष्टियां
शिकायतकर्ता के अनुसार, बैंक विवरण में 3 जून 2021 को 75 हजार रुपये और 11 जून को 54 हजार रुपये की केसीसी संबंधी राशि जमा होने का उल्लेख है। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में कुल 1 लाख 29 हजार रुपये की नकद निकासी दर्ज होने की बात कही गई है। अन्य प्रविष्टियों में किसान न्याय योजना से संबंधित राशि का भी उल्लेख है।
इन लेनदेन की वास्तविक प्रकृति और वैधता की पुष्टि बैंक के प्रमाणित रिकॉर्ड से होना आवश्यक है। प्रमुख सवाल यह है कि ऋण आवेदन कब किया गया, स्वीकृति किस तारीख को मिली और नकद राशि वास्तव में किस व्यक्ति ने प्राप्त की।
चेक की लिखावट और अंगूठे के निशान की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने तत्कालीन लिपिक सोहराब अंसारी की चेक पर लिखावट होने का दावा करते हुए विशेषज्ञ जांच की मांग की है। वहीं, भुगतान पर्चियों पर मौजूद अंगूठे के निशान की प्रामाणिकता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इन दावों की पुष्टि केवल मूल दस्तावेजों, प्रमाणित नमूनों और आवश्यक होने पर फॉरेंसिक जांच से ही हो सकती है। मामले में तत्कालीन समिति प्रबंधक जीवतेश श्रीवास्तव की भूमिका और बैंक शाखा में भुगतान के समय अपनाई गई प्रक्रिया की जांच की मांग भी की जा रही है। किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच में सामने आए प्रमाणों के आधार पर ही तय की जानी चाहिए।
शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने के भी आरोप
शिकायतकर्ता देवीचरण ने मामले में शिकायत वापस लेने के लिए कथित दबाव और धमकी दिए जाने के आरोप लगाए हैं। 15 अक्टूबर 2026 को उन्हें भैयाथान स्थित बैंक शाखा ले जाकर जबरन बैठाए रखने का दावा भी किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई
मामले में मृत्यु प्रमाणपत्र, केसीसी ऋण आवेदन, स्वीकृति आदेश, मूल चेक, भुगतान वाउचर, बैंक स्टेटमेंट और समिति के रजिस्टर की जांच आवश्यक है। साथ ही यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऋण की प्रक्रिया किसने पूरी की और भुगतान किसे किया गया।
यदि जांच में दस्तावेजों में गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और अंतिम निष्कर्ष निष्पक्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।