घनी बस्ती में ज्वलनशील सामग्री रखने पर न्यायालय की टिप्पणी: “अत्यंत खतरनाक”
अंबिकापुर। जिला एवं सत्र न्यायालय, सरगुजा ने राम मंदिर रोड अग्निकांड मामले में आरोपी प्रवीण कुमार अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका **खारिज** कर दी है। कोर्ट ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर माना और घनी आबादी वाले इलाके में पटाखों एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण को सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया।
मामला क्या है?
23 अप्रैल 2026 को अंबिकापुर के राम मंदिर रोड स्थित एक दुकान में भीषण आग लगी। आरोपी पक्ष ने दावा किया था कि दुकान में प्लास्टिक का सामान था और आग शॉर्ट सर्किट से लगी। लेकिन पुलिस जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और केस डायरी में कई गंभीर तथ्य सामने आए।
न्यायालय के आदेश में उल्लेखित मुख्य तथ्य:
– घटनास्थल पर अधजले पटाखों के अवशेष बरामद
– दुकान की छत पर वेल्डिंग कार्य चल रहा था, चिंगारियों से आग फैली
– घनी रिहायशी गली में पटाखा और प्लास्टिक का अवैध भंडारण
– आग ने आसपास के कई मकानों को नुकसान पहुंचाया
– अनुमानित क्षति: **50 से 55 लाख रुपये**
– एक बच्ची सहित कई लोग घायल
कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायालय ने कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। अग्रिम जमानत दिए जाने पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रहती है। कोर्ट ने यह भी माना कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी।
महत्वपूर्ण बातें:
– मोहल्ले के लोगों ने पहले भी पटाखा भंडारण को लेकर आपत्ति जताई थी
– पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर BNS की धारा 324(6), 326(छ) और विस्फोटक अधिनियम की गंभीर धाराएं जोड़ी गईं
– प्रारंभिक धाराएं: 125, 270, 287 BNS
बड़ा सवाल
अंबिकापुर जैसे शहरों में घनी बस्तियों के अंदर ज्वलनशील पदार्थों (पटाखे, प्लास्टिक, केमिकल) का भंडारण किसकी नजर में चल रहा है? स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन विभाग की निगरानी कहां तक प्रभावी है? क्या शहर में ऐसे और छिपे भंडारण चल रहे हैं?
यह घटना अब केवल एक आग का मामला नहीं रह गई है, बल्कि शहरी सुरक्षा और अवैध भंडारण पर सिस्टम की नाकामी का प्रतीक बन गई है।
न्यायालय का फैसला आने के बाद आरोपी पक्ष अब नियमित जमानत याचिका दायर कर सकता है। पुलिस मामले की जांच तेज कर रही है।