अंबिकापुर । शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई निगरानी व्यवस्था में वर्तमान में 90 कैमरों में से केवल 15 कैमरे ही चालू हैं, जबकि बाकी कैमरे खराब पड़े हैं। ऐसे में शहर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। जिस ‘तीसरी आंख’ के भरोसे पुलिस और प्रशासन ने अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक निगरानी और घटनाओं की त्वरित जांच के दावे किए थे, वही व्यवस्था लंबे समय से कमजोर नजर आ रही है। यदि शहर के अधिकांश कैमरे बंद हैं तो चोरी, लूट, सड़क दुर्घटना, छिनतई और अन्य घटनाओं में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाना चुनौती बन सकता है।
करोड़ों खर्च के बाद रखरखाव पर सवाल
सीसीटीवी कैमरे लगाने के दौरान दावा किया गया था कि शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी मजबूत होगी। कैमरों की मौजूदगी से अपराधियों में भय रहेगा और पुलिस को घटनाओं की जांच में मदद मिलेगी।
लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के बाद रखरखाव की व्यवस्था क्यों कमजोर पड़ी?
क्या कैमरों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंध था?
यदि था तो खराब कैमरे समय पर ठीक क्यों नहीं हुए?
यदि नहीं था तो करोड़ों की योजना बिना स्थायी रखरखाव व्यवस्था के कैसे शुरू की गई?
सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा असर
सीसीटीवी कैमरे केवल घटना के बाद जांच का माध्यम नहीं होते, बल्कि अपराध रोकने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। कैमरे चालू होने से अपराधियों में रिकॉर्ड होने का डर रहता है। लेकिन जब कैमरे बंद हो जाते हैं तो आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है। व्यापारी, महिलाएं, छात्र और आम लोग यह जानना चाहते हैं कि यदि किसी क्षेत्र में कोई गंभीर घटना होती है तो उसकी निगरानी और रिकॉर्डिंग कौन करेगा?
जिम्मेदारी किसकी?
सीसीटीवी व्यवस्था में पुलिस विभाग, नगर निगम, प्रशासन और तकनीकी एजेंसी की भूमिका होती है। लेकिन कैमरे बंद होने के बाद अब तक किसी एक जिम्मेदार विभाग या एजेंसी की जवाबदेही तय नहीं हुई है।
जनता के सवाल
90 कैमरों में से कितने कैमरे कब से खराब हैं?
कैमरों की मरम्मत में देरी क्यों हुई?
रखरखाव के लिए अब तक कितना खर्च किया गया?
खराबी के लिए जिम्मेदार कौन है?
पूरी निगरानी व्यवस्था कब तक सामान्य होगी?
15 कैमरे चालू, बाकी की
मरम्मत जल्द शुरू होने का दावा
पुलिस कंट्रोल रूम प्रभारी दुर्गेश्वरी चौबे ने बताया कि शहर में कुल 90 कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से 15 कैमरे ठीक कर चालू कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कैमरों की मरम्मत का काम फिलहाल रुका हुआ है, जिसे जल्द दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से खराब पड़े कैमरों को दुरुस्त कर सक्रिय किया जाएगा। अब देखने वाली बात होगी कि करोड़ों रुपये की यह निगरानी व्यवस्था कब पूरी तरह पटरी पर लौटती है और शहर की ‘तीसरी आंख’ फिर से कितनी प्रभावी हो पाती है।