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सरगुजा के जिला शिक्षा अधिकारी ने वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने पर एक प्रधान पाठक व एक लेखपाल को किया सस्पेंड,

Priyanshu Ranjan

जनगणना कार्य में दोषी चार शिक्षकों की रोकी एक एक वार्षिक वेतनवृद्धि

अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर शिक्षा विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी गाज गिराई है। विभाग की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

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जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) डॉ. दिनेश कुमार झा ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए एक प्राथमिक शाला की प्रधान पाठक और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय के लेखापाल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय महत्व के जनगणना कार्य में घोर लापरवाही बरतने के दोषी पाए गए चार अन्य शिक्षकों की एक-एक वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

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प्रशासनिक स्तर पर हुई इस बड़ी कार्रवाई की जद में सबसे पहले उदयपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला पंडरीडांड की प्रधान पाठक अंजेला किण्डो आईं। उनके खिलाफ शासकीय राशि के दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय हेराफेरी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जब उच्च स्तरीय जांच बैठाई गई, तो परत-दर-परत कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

जांच रिपोर्ट में यह बात प्रमाणित हुई कि प्रधान पाठक ने बच्चों के बालवाड़ी संचालन के लिए आवंटित की गई सरकारी राशि के आहरण में न केवल भारी गड़बड़ी की, बल्कि फर्जी हस्ताक्षरों का सहारा लेकर शासकीय धन का अनधिकृत ट्रांसफर भी किया। इसके अलावा, उन्होंने सरकारी खरीद से जुड़े भंडार क्रय नियमों की भी जमकर धज्जियां उड़ाईं, जिसके बाद डीईओ ने उन्हें नौकरी से निलंबित कर दिया।

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वित्तीय मामलों में इसी तरह की गंभीर लापरवाही सीतापुर बीईओ कार्यालय में भी देखने को मिली, जहां पदस्थ लेखापाल दूधनाथ सिंह को अपनी मनमानी और पदीय दायित्वों के प्रति उदासीनता भारी पड़ गई। लेखापाल पर आरोप था कि उन्होंने विभाग से सेवानिवृत्त हुए एक कर्मचारी के स्वत्वों के भुगतान में जानबूझकर ढिलाई बरती और नियमों को ताक पर रखकर पात्रता से कहीं अधिक अवकाश नगदीकरण (लीव एन्कैशमेंट) की राशि का भुगतान कर दिया। इस वित्तीय चूक और शासकीय नियमों के उल्लंघन की जांच में पुष्टि होने के बाद विभाग ने उनके निलंबन का आदेश जारी करने में तनिक भी देर नहीं की।

एक ओर जहां वित्तीय गड़बड़ियों पर यह कड़ा एक्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय कर्तव्य यानी जनगणना के कार्य को हल्के में लेने वाले चार शिक्षकों पर भी प्रशासनिक चाबुक चला है। अतिरिक्त कलेक्टर एवं प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी से प्राप्त एक गोपनीय प्रतिवेदन के आधार पर, जिसमें इन शिक्षकों द्वारा जनगणना कार्य में घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता बरतने का स्पष्ट उल्लेख था। विभाग ने इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की। इसके तहत शासकीय प्राथमिक शाला आमापारा (लुण्ड्रा) के सहायक शिक्षक सुखदेव राम, शासकीय प्राथमिक शाला ससौलीपारा के प्रधान पाठक उमेश कुमार तिवारी, शासकीय प्राथमिक शाला आमगांव (मैनपाट) के सहायक शिक्षक उमेश सिंह नेताम और शासकीय प्राथमिक शाला समनिया के सहायक शिक्षक रवि कुमार की एक-एक वार्षिक वेतनवृद्धि (इन्क्रीमेंट) को हमेशा के लिए रोक दिया गया है।

इस पूरी कार्रवाई के बाद जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने जिले के सभी मातहत कर्मचारियों और अधिकारियों को कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि शासन के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों, शासकीय योजनाओं और विभागीय दायित्वों के निर्वहन में किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनुशासनहीनता या वित्तीय भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीईओ ने चेतावनी भरे लहजे में साफ किया कि विभाग अब हर छोटे-बड़े शासकीय कार्यों की निरंतर और सूक्ष्म निगरानी कर रहा है, और यदि भविष्य में भी कहीं कोई वित्तीय गड़बड़ी या काम के प्रति लापरवाही उजागर होती है, तो संबंधितों के खिलाफ इससे भी अधिक कठोर दंडात्मक और नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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