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मामला स्कूटी से कुत्ते को बांधकर घसीटने का : सोशल मीडिया वीडियो से मचा हड़कंप, दो महिलाओं पर पशु क्रूरता की FIR दर्ज : अमानवीय कृत्य पर समाज में आक्रोश -मातृत्व और मानवता पर उठे गंभीर प्रश्न।

Priyanshu Ranjan

भरत शर्मा की रिपोर्ट

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रतलाम/मध्यप्रदेश के रतलाम में पशु क्रूरता का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। वायरल वीडियो और पुलिस दस्तावेजों के अनुसार, 6 मार्च 2026 की रात करीब 9:35 बजे एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए वीडियो ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। वीडियो में कथित तौर पर एक महिला अपनी स्कूटी के पीछे एक कुत्ते के बच्चे को बांधकर सड़क पर घसीटते हुए दिखाई दे रही है।

सूचना के अनुसार यह वीडियो “ब्रेकिंग न्यूज़ रतलाम” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया गया, जिसके बाद समूह के सदस्य पत्रकार विजय मीणा ओर आदिति मिश्रा,अमित निगम ने इसे देखकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत में बताया गया कि वीडियो में एक महिला स्कूटी चलाते हुए पीछे रस्सी से बंधे कुत्ते के बच्चे को घसीटते हुए जा रही है। इस घटना के दौरान कुत्ते के गले में पट्टा बंधा दिखाई देता है और वह सड़क पर बुरी तरह तड़पता नजर आता है।

पुलिस दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के अनुसार, इस मामले में दीपिका पाटीदार रतलाम और पूजा पांचाल का नाम सामने आया है। घटना के बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस से उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस के अनुसार FIR दर्ज कर ली गई

यह घटना केवल एक कानूनी प्रकरण भर नहीं, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा नैतिक और मानवीय प्रश्न भी खड़ा करती है। आज भारत में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर कई सख्त कानून बनाए गए हैं। दहेज, घरेलू हिंसा और उत्पीड़न जैसे मामलों में महिलाओं को कानूनी संरक्षण देने के लिए न्याय व्यवस्था बेहद मजबूत मानी जाती है। लेकिन कई बार यह भी चर्चा का विषय बनता है कि कुछ मामलों में पुरुष वर्ग पर झूठे आरोपों का बोझ भी पड़ता है और पुलिस को भी कानूनी प्रावधानों के कारण अत्यंत सावधानी के साथ कार्रवाई करनी पड़ती है।

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कानून के रखवालों के सामने भी एक दुविधा रहती है एक ओर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना उनका कर्तव्य है, तो दूसरी ओर समाज में घट रही घटनाओं की सच्चाई को भी सामने लाना जरूरी है। महिला सुरक्षा कानून इतने सशक्त माने जाते हैं कि कई बार लोग यह भी कहते हैं कि कानून का पलड़ा महिलाओं के पक्ष में अधिक झुका हुआ दिखाई देता है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक अलग और गहरी संवेदनशीलता का सवाल उठता है। समाज में महिला को ममता, करुणा और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। वही महिला जब किसी मासूम और बेजुबान जीव के साथ क्रूर व्यवहार करती हुई दिखाई दे, तो यह केवल कानून का नहीं बल्कि मानवता का भी प्रश्न बन जाता है।

मां ही वह शक्ति है जो संतान को जन्म देती है,पालन-पोषण करती है और करुणा की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है। ऐसे में यदि कोई महिला किसी बेजुबान प्राणी को स्कूटी से बांधकर घसीटने जैसा कृत्य करे, तो यह मातृत्व की भावना पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को घोर निंदनीय बताया है। उनका कहना है कि चाहे कानून के तहत सजा मिले या नहीं, लेकिन समाज को यह जरूर सोचना होगा कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। आधुनिकता और अधिकारों की दौड़ में कहीं हम संवेदनशीलता और मानवता को तो पीछे नहीं छोड़ रहे? यह घटना केवल एक पुलिस केस नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आईना है — जो यह दिखाती है कि अधिकारों के साथ जिम्मेदारी और करुणा भी उतनी ही जरूरी है।

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अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कानून इस मामले में क्या कदम उठाता है।फिलहाल यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा और चिंतन का विषय बनी हुई है।

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