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अब ईडी करेगी सरगुजा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में हुए करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार की जांच,

Priyanshu Ranjan

अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के भीतर पनपे करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की परतें अब देश की सबसे ताकतवर जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) खोलने जा रही है। करीब 28 करोड़ रुपये के इस महाघोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता संकेत मिलने के बाद ईडी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने मामले की कमान संभाल ली है और बैंक प्रबंधन से जांच से जुड़े तमाम अहम दस्तावेज तलब कर लिए हैं। इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि बैंक के सीईओ श्रीकांत चंद्राकर ने शनिवार को की, जिसके बाद से ही संबंधित अधिकारियों और संलिप्त कर्मियों के बीच हड़कंप की स्थिति है। यह पूरा मामला साल 2025 में ऑडिट के दौरान तब उजागर हुआ था, जब तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर की सतर्कता के कारण शंकरगढ़ और कुसमी जैसी शाखाओं में वित्तीय अनियमितताओं का पहाड़ सामने आया।

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जांच की यह आंच केवल पुराने मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच के घेरे में सरगुजा की केरजू सहकारी समिति में सामने आया एक नया फर्जीवाड़ा भी जुड़ गया है, जहाँ 127 निर्दोष किसानों के फर्जी हस्ताक्षर कर करीब 1.93 करोड़ रुपये का कर्ज निकाल लिया गया। राज्य शासन ने पूर्व कलेक्टर की सिफारिशों को गंभीरता से लेते हुए इस पूरे प्रकरण को ईडी को सौंपने का निर्णय लिया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गबन की गई इस भारी-भरकम राशि को किन बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया या कहाँ खपाया गया। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि मुख्य आरोपी और बर्खास्त बैंक मैनेजर अशोक कुमार सोनी ने न केवल फर्जी खाते खोले, बल्कि किसानों के केसीसी फंड, मनरेगा की राशि और यहाँ तक कि ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए आवंटित फंड में भी बड़ी सेंधमारी की।

कानूनी कार्रवाई के मोर्चे पर

पुलिस पहले ही मुख्य सरगना अशोक सोनी समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जिनमें से 4 उच्चाधिकारियों को बैंक ने बर्खास्त कर दिया है। विडंबना यह है कि इस लूट में शामिल तीन कर्मचारी घोटाला उजागर होने से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन अब केंद्रीय एजेंसी की सक्रियता के बाद कोई भी दोषी कानून के लंबे हाथों से बचता नजर नहीं आ रहा है। ईडी अब उन तमाम कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि सहकारी बैंक की तिजोरी से निकला यह पैसा किन-किन रसूखदारों की जेबों तक पहुँचा। हालांकि ईडी की टीम अभी तक भौतिक रूप से सरगुजा नहीं पहुँची है, लेकिन शनिवार को भेजे गए डिजिटल और कागजी साक्ष्य इस मामले में बड़ी कार्रवाई की भूमिका तैयार कर चुके हैं।

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