कोल फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री सुजीत सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन,
सूरजपुर। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के आह्वान पर केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के विरोध में चलाए जा रहे देशव्यापी आंदोलन के तहत सूरजपुर जिला मुख्यालय में श्रमिक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद श्रमिकों ने विशाल रैली निकाली और गगनभेदी नारों के साथ प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
कोल फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री सुजीत सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध विभिन्न अनुषांगिक संगठनों के महिला एवं पुरुष कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। रैली के दौरान श्रमिकों ने श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी प्रावधानों को हटाने तथा सामाजिक सुरक्षा एवं वेतन संबंधी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
श्रमिकों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने स्कीम कर्मियों के मानदेय में वृद्धि, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने तथा संविदा कर्मचारियों के लिए समान काम के लिए समान वेतन लागू करने की मांग की।
इसके साथ ही ईएसआईसी के लिए वेतन सीमा 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार रुपये, बोनस की गणना के लिए अधिकतम वेतन सीमा 7 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये तथा न्यूनतम ईपीएफ वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये किए जाने की मांग रखी गई।
श्रमिक संगठनों ने पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने तथा बोनस पात्रता वेतन की सीमा को 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार रुपये करने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाई।
सामाजिक सुरक्षा और वेतन पर सरकार से गंभीरता की मांग
धरना-प्रदर्शन के बाद निकाली गई रैली में श्रमिकों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा, वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। श्रमिकों के हितों से जुड़े प्रावधानों में सुधार कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना समय की आवश्यकता है।
भारतीय मजदूर संघ से जुड़े श्रमिक नेताओं ने कहा कि संगठन श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा। प्रदर्शन में विभिन्न अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारी, महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




