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छत्तीसगढ़ की स्कूल शिक्षा में दो साल के बड़े बदलाव, शिक्षक भर्ती से डिजिटल मॉनिटरिंग तक सरकार का फोकस,

Priyanshu Ranjan

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए पिछले दो वर्षों में कई स्तरों पर बदलाव किए गए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने 21 अगस्त को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग के दो वर्षों के कामकाज और उपलब्धियों का ब्यौरा साझा किया। उन्होंने बताया कि सरकार का जोर केवल शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, डिजिटल मॉनिटरिंग, बहुभाषी शिक्षा, स्कूल अधोसंरचना और विद्यार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी है।

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10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण, हजारों शिक्षकों का समायोजन

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मंत्री के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रावधानों के अनुरूप 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया है। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन हुआ। विभाग के मुताबिक 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई है, जबकि 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भी अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था की गई।

शिक्षकों की पदोन्नति के क्षेत्र में भी विभाग ने महत्वपूर्ण प्रगति का दावा किया है। टी संवर्ग में 1,335 और ई संवर्ग में 1,478 प्राचार्यों की पदोन्नति की गई। इसके अलावा 1,798 व्याख्याताओं की पदोन्नति सहित विभिन्न पदों पर पिछले दो वर्षों में 7,000 से अधिक पदोन्नतियां की गई हैं।

5 हजार शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी

स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार पिछले दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की गई है। वहीं 5,000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। दिव्यांग बच्चों के लिए 848 स्पेशल एजुकेटर पद स्वीकृत किए गए हैं और वर्ष 2025 में 62 पदों पर सीधी नियुक्ति की गई।

स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में 3,000 से अधिक पदों पर संविदा भर्ती की प्रक्रिया भी जारी है।

भर्ती प्रक्रिया में ऑनलाइन परीक्षा का इस्तेमाल

सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में भी कदम उठाया है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय और अन्य शासकीय संस्थाओं में संविदा पदों के लिए राज्य स्तरीय ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT शुरू की गई है।

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विभाग के अनुसार स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के 1,895 और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के 1,171 पदों सहित कुल 3,066 पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया चल रही है। सरकार का कहना है कि CBT से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और परीक्षा परिणाम कम समय में उपलब्ध होंगे।

स्थानीय भाषाओं को शिक्षा से जोड़ने की कोशिश

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषाओं और बहुभाषी शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। विभाग के मुताबिक छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने भाषा-चित्रण यानी Language Mapping का कार्य किया है।

बस्तर संभाग में बच्चों की स्थानीय भाषा को कक्षा में उपयोग करने के लिए 2,700 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी को शिक्षा के माध्यम के अनुरूप पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।

45 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तक

विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री समय पर उपलब्ध कराने पर भी विभाग ने जोर दिया है। विभाग के अनुसार कक्षा 1 से 10 तक के 45 लाख 33 हजार 261 विद्यार्थियों को सत्र शुरू होने से पहले पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की पहल की गई।

पाठ्यपुस्तकों के वितरण और सत्यापन में स्कैनिंग व्यवस्था लागू की गई है। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 16 बोलियों में पाठ्यपुस्तक प्रकाशन की पहल भी की गई है।

साइकिल और गणवेश से लाखों विद्यार्थी लाभान्वित

निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना के तहत 1 लाख 62 हजार 827 बालिकाओं को लाभ मिलने की जानकारी दी गई। वहीं कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश उपलब्ध कराया गया, जिससे 28 लाख 63 हजार 786 बच्चे लाभान्वित हुए।

ऑनलाइन उपस्थिति से लेकर एआई मॉनिटरिंग तक

स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक कामकाज को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। शिक्षकों की उपस्थिति के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक और टीके ऐप की व्यवस्था लागू की गई है। विभाग के मुताबिक प्रतिदिन करीब 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति टीके ऐप के माध्यम से दर्ज हो रही है।

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अवकाश प्रबंधन पोर्टल, पेपरलेस कार्यप्रणाली और ऑनलाइन संपत्ति विवरण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।

शिक्षा व्यवस्था की ऑनलाइन निगरानी के लिए एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से स्कूल अधोसंरचना, भौतिक सुविधाओं, पीएम पोषण और विभिन्न योजनाओं की निगरानी की जा रही है। विभाग के अनुसार कॉल सेंटर के माध्यम से शिक्षकों, पालकों और अधिकारियों से एक लाख से अधिक कॉल के जरिए फीडबैक लिया गया है।

स्कूल भवन और अतिरिक्त कक्षों पर भी फोकस

स्कूलों की अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पिछले तीन वर्षों में 504 नए विद्यालयों को मंजूरी दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन विद्यालयों के लिए नए विद्यालय भवन का प्रावधान किया गया है।

वर्ष 2023 से 2026 के बीच 2,583 अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई। स्कूलों के शौचालय निर्माण और मरम्मत के लिए 52.39 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए ₹100 करोड़

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण एवं संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार की योजना प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करने की है।

बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने का दावा

दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। विभाग के अनुसार नियत नेल्ला नार के अंतर्गत बस्तर संभाग के छह जिलों के 97 प्रतिशत ग्रामों में प्राथमिक शालाओं की स्थापना की गई है।

द्विभाषीय पुस्तकों के माध्यम से 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इस दौरान 48 बंद विद्यालय दोबारा खोले गए और 36 नए विद्यालय शुरू किए गए।

PVTG बच्चों के लिए आवासीय सुविधा

प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों के लिए विद्यालयों के आसपास आवासीय सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। विभाग के मुताबिक प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में 33 हजार से अधिक बच्चे आवासीय सुविधा का लाभ ले रहे हैं।

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13 जिलों में 40 PVTG छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 21 का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत भी 13 जिलों में 42 छात्रावासों की स्वीकृति दी गई है।

परीक्षा परिणाम में करीब 2 प्रतिशत सुधार

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों में करीब 2 प्रतिशत वृद्धि होने की जानकारी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। परीक्षा पूर्व समीक्षा, ब्लूप्रिंट निर्माण, बेहतर अध्यापन और पालक-शिक्षक बैठकों के जरिए परिणाम सुधारने की रणनीति अपनाई गई है।

शनिवार को बैग-रहित गतिविधियों पर जोर

विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए प्रत्येक शनिवार बैग-रहित दिवस के रूप में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इनमें खेल, योग, व्यायाम, स्थानीय कला-संस्कृति, महापुरुषों की जयंती, तीज-त्योहार और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं।

भाषण, निबंध, गीत, कहानी और लोककथाओं जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता और स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का बड़ा लक्ष्य

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव के अनुसार पिछले दो वर्षों में किए गए इन प्रयासों का उद्देश्य प्रदेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जो गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित हो। सरकार की प्राथमिकताओं में एक ओर शिक्षकों की उपलब्धता और भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करना है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों की अधोसंरचना, डिजिटल निगरानी, स्थानीय भाषाओं और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को भी विस्तार देना शामिल है।

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