समिति का 33वां संवेदना सहयोग, अब तक 33 दिवंगत शिक्षक परिवारों को 33 लाख रुपये की आर्थिक सहायता
सूरजपुर, 11 जुलाई। संयुक्त संवेदना समिति सूरजपुर ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दिवंगत शिक्षिका स्वर्गीय ललिता सिदार के परिजनों को समिति के नियमानुसार 1 लाख रुपये की संवेदना सहायता राशि प्रदान की। यह समिति का 33वां संवेदना सहयोग है। अब तक समिति 33 दिवंगत सदस्यों के परिवारों को कुल 33 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करा चुकी है।
स्व. ललिता सिदार विकासखंड ओड़गी के पूर्व माध्यमिक शाला गुर्दापारा (संकुल केंद्र खर्रा) में शिक्षिका के रूप में पदस्थ थीं। 15 जून 2026 को मनेंद्रगढ़-कोटाडोल मार्ग पर हुए सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उपचार के लिए उन्हें बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। वे मूल रूप से रायगढ़ जिले की निवासी थीं और उनका विवाह 10 मई 2026 को हुआ था।
कम उम्र में शिक्षा जगत ने खोई समर्पित शिक्षिका
महज 30 वर्ष 7 दिन की आयु और 2 वर्ष 7 माह 2 दिन के शिक्षकीय सेवाकाल में स्व. ललिता सिदार ने अपनी नवाचारी शिक्षण शैली, अनुशासन और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण से विशेष पहचान बनाई थी। उनके असामयिक निधन को शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया।
परिजनों को सौंपा गया सहायता राशि का चेक
समिति की ओर से दिवंगत शिक्षिका के पिता कपूर सिंह सिदार और भाई गजेंद्र सिदार को 1 लाख रुपये का सहायता चेक सौंपा गया। इस दौरान उपस्थित शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
10 जुलाई तक चला सदस्यता अभियान
समिति के जिला संचालक सचिन त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2026 का सदस्यता अभियान 10 जुलाई तक संचालित किया गया। उन्होंने अधिक से अधिक शिक्षकों से इस मानवीय पहल से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि समिति विपरीत परिस्थितियों में शिक्षक परिवारों के लिए मजबूत सहारा बन रही है।
स्वत्व भुगतान जल्द कराने का आश्वासन
कार्यक्रम में संकुल प्राचार्य प्रदीप कुमार सिंह एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी मोतीलाल राजवाड़े ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि दिवंगत शिक्षिका के सभी सेवा संबंधी स्वत्वों का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित कराया जाएगा।
कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं बड़ी संख्या में संयुक्त संवेदना समिति के सदस्य उपस्थित रहे।