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रतलाम पुरानी यादें, नई मुलाकातें ; 23 साल बाद 2002 बैच का भव्य पुनर्मिलन,हँसी, मस्ती और अपनत्व की भावनाओं से गूँज उठा

Priyanshu Ranjan

भरत शर्मा की रिपोर्ट

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रतलाम”दिल तो अभी भी बच्चा है” — इसी स्नेहिल भावना को हृदय में संजोकर, सरस्वती विद्या मंदिर के सन् 2002 की बैच के विद्यार्थियों ने 23 वर्षों बाद एक बार फिर एक-दूसरे से मिलकर अपने सुनहरे छात्र जीवन की स्मृतियों को ताज़ा किया। इस अवसर पर सभी का मन एक बार फिर हँसी, मस्ती और अपनत्व की भावनाओं से गूँज उठा।

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कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद विद्यालय में प्रचलित प्रार्थना का सामूहिक वाचन किया गया, जिसने सभी को अपने विद्यार्थी जीवन के दिनों में पहुँचा दिया। इसके पश्चात मंच पर आए भूतपूर्व विद्यार्थियों ने अपने-अपने अनुभव और यादगार किस्से साझा किए, जिनमें स्कूल के दिनों की हँसी-मज़ाक, कक्षाओं की यादें और शिक्षकों का स्नेह प्रमुख रहा।

माहौल को और भी जीवंत बनाने के लिए विभिन्न रोचक खेलों का आयोजन किया गया। रंगारंग नृत्य और मस्तीभरे पलों ने सभी को मानो वर्षों पीछे ले जाकर बचपन में पहुँचा दिया।

समिति अध्यक्ष सीए अर्पित शर्मा ने बताया की इस पुनर्मिलन में वलसाड, बाँसवाड़ा, मेघनगर, इंदौर, उज्जैन और भोपाल जैसे विभिन्न शहरों से भैया-बहन उत्साहपूर्वक शामिल हुए। कार्यक्रम में सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मालवा के प्रांतीय सचिव श्री गोपाल काकानी, विद्यालय समिति के सचिव श्री शैलेंद्र सुरेका, रतलाम भूतपूर्व छात्र संगठन के अध्यक्ष श्री गौरव काकानी, जिला प्रभारी आचार्य अरविंद मिश्रा , इंदु व्यास दीदी, शिला दीदी, आचार्य बिष्ट, आचार्य विवेक सहित कई वरिष्ठजन एवं पूर्व आचार्यगण की गरिमामयी उपस्थिति रही।इस अवसर पर उन आचार्य एवं दीदी को भी याद किया गया जो अब हमारे बीच नहीं हैं। आचार्य अश्विन पटेल एवं भावना दीदी को 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिससे पूरा माहौल भावुक हो उठा।

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अतिथि अभिवादन समिति अध्यक्ष सीए अर्पित शर्मा द्वारा करके सभी अतिथियों का पारंपरिक तिलक के साथ स्वागत समिति उपाध्यक्ष हरिश गोयल एवं सचिव विमल देतवाल ने किया। स्मृति-चिह्न भेंट करने का कार्य सह सचिव दिपेन्द्र सराफ एवं संदीप मेहता द्वारा संपन्न हुआ। गेम की विजेता सिल्की पटवा सुमित कटारिया रहे, कार्यक्रम का संचालन शीतल सराफ एवं मनीष सोनी ने सहजता और उत्साह के साथ किया, जबकि अंत में आभार प्रदर्शन संयोजक अर्पित गांधी ने किया।

इस अवसर पर सभी उपस्थित साथियों ने यह संकल्प भी लिया कि भविष्य में ऐसे पुनर्मिलन कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाएँ, ताकि यह अपनत्व और दोस्ती का बंधन सदैव मजबूत बना रहे।

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