महिला सशक्तिकरण से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर,
विशेष लेख
डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक
रायपुर, 21 अगस्त 2026
- महिला सशक्तिकरण से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर,
- महतारी वंदन योजना बनी आर्थिक संबल का आधार
- बेटियों के भविष्य की सुरक्षा पर जोर
- पोषण और आंगनबाड़ी व्यवस्था को मिल रहा विस्तार
- महतारी सदन : सुरक्षा से स्वावलंबन तक
- महिला सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था
- स्वयं सहायता समूहों से बढ़ी आर्थिक ताकत
- स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार
- निर्माण श्रमिक महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा
- शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान की दिशा में पहल
- विवाह और स्वरोजगार में आर्थिक सहयोग
- सम्मान से नेतृत्व तक
किसी भी समाज की प्रगति का सबसे मजबूत आधार उसकी महिलाओं की स्थिति होती है। जब महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती है, तो उसका प्रभाव केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार मजबूत होता है, बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है और समाज विकास की नई दिशा में आगे बढ़ता है। इसी व्यापक सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को सुशासन और समावेशी विकास की प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाते हुए राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर अनेक महत्वपूर्ण पहल कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को सहायता प्राप्त करने वाली लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करना है।
महतारी वंदन योजना बनी आर्थिक संबल का आधार
महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करने वाली प्रमुख योजनाओं में महतारी वंदन योजना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है।
अब तक 30 किस्तों के माध्यम से महिलाओं को 19 हजार 444 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। वर्ष 2026-27 के बजट में भी योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि महिलाओं को घरेलू आवश्यकताओं के साथ-साथ छोटे आर्थिक निर्णयों में भी अधिक आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बन रही है।
बेटियों के भविष्य की सुरक्षा पर जोर
राज्य सरकार बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए रानी दुर्गावती योजना प्रारंभ कर रही है। योजना के तहत बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इन पहलों का उद्देश्य बालिकाओं और माताओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा सामाजिक संरक्षण को मजबूत करना है।
पोषण और आंगनबाड़ी व्यवस्था को मिल रहा विस्तार
महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण को मजबूत करने के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये और कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शहरी क्षेत्रों में 250 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे बच्चों के पोषण के साथ माताओं और किशोरियों तक स्वास्थ्य एवं जागरूकता सेवाओं की पहुंच भी मजबूत होगी।
महतारी सदन : सुरक्षा से स्वावलंबन तक
महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
महतारी सदन केवल भवन नहीं, बल्कि महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका, सामाजिक गतिविधियों और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ने वाले केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।
महिला सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था
महिलाओं को संकट की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित हैं। यहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और अन्य संकटों से जूझ रही महिलाओं को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के समन्वय से त्वरित सहायता व्यवस्था को भी प्रभावी बनाया गया है। डिजिटल एसओपी के माध्यम से सखी वन-स्टॉप सेंटरों की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में भी कदम उठाया गया है।
स्वयं सहायता समूहों से बढ़ी आर्थिक ताकत
महिला सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी पक्ष आर्थिक आत्मनिर्भरता है। इसी दिशा में बिहान मिशन के माध्यम से लाखों महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें उत्पादन, उद्यमिता और बाजार से जोड़ा जा रहा है।
प्रदेश में 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित हो चुके हैं, जिनसे 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी के लक्ष्य की दिशा में छत्तीसगढ़ ने भी उल्लेखनीय प्रगति की है और 10 लाख 43 हजार से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में आगे बढ़ाया गया है।
रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय व्यवसायों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं।
स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार
महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पाद अब गांव और स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं। जशप्योर जैसे महिला-नेतृत्व वाले ब्रांड “वोकल फॉर लोकल” की भावना को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं।
यूनिटी मॉल जैसी पहल के माध्यम से महिला समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं सखी साड़ी, मिलेट कैफे और स्थानीय उत्पाद आधारित गतिविधियां महिलाओं की उद्यमशीलता को नई पहचान दे रही हैं।
निर्माण श्रमिक महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा
महिला निर्माण श्रमिकों के लिए भी राज्य सरकार विभिन्न सहायता योजनाएं संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये तथा दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के माध्यम से स्वरोजगार के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत पात्र गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य महिला श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के साथ आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान की दिशा में पहल
महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सुशिक्षा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
शुचिता योजना के माध्यम से 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं। इसका उद्देश्य किशोरियों के बीच मासिक स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से भी प्रदेश की 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य और घरेलू जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव आया है।
विवाह और स्वरोजगार में आर्थिक सहयोग
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है।
वहीं महिला समृद्धि योजना के तहत 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
सम्मान से नेतृत्व तक
महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास करना भी है। उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने तथा सफल महिला उद्यमियों को अध्ययन भ्रमण के अवसर देने जैसी पहलें उन्हें अपने अनुभव साझा करने और नई महिलाओं को प्रेरित करने का मंच प्रदान कर रही हैं।
आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण योजनाओं और आंकड़ों से आगे बढ़कर सामाजिक परिवर्तन का अभियान बनता दिखाई दे रहा है। आर्थिक सहायता से लेकर स्वरोजगार तक, पोषण से लेकर स्वास्थ्य तक, सुरक्षा से लेकर सम्मान तक और स्थानीय उत्पादों से लेकर वैश्विक बाजार तक—महिलाओं के लिए अवसरों का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में “आत्मनिर्भर नारी, समृद्ध छत्तीसगढ़” की परिकल्पना को जमीन पर उतारने का प्रयास महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं इस बदलाव को संस्थागत आधार दे रही हैं।
जब छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने निर्णय लेने लगेंगी, अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में भागीदार बनेंगी और अपने हुनर को बाजार से जोड़ेंगी, तब प्रदेश की विकास यात्रा और अधिक मजबूत होगी। यही महिला सशक्तिकरण की वास्तविक सफलता है और यही “सुशासन से समृद्धि” की दिशा में बढ़ते छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर है।




