रायपुर, 12 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच पुलिस ने ‘साइबर संकल्प’ के जरिए जागरूकता अभियान को नई दिशा देने की कोशिश की है। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में 500 से अधिक विद्यार्थियों की मौजूदगी में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 9 वीडियो मॉड्यूल वाले इस अभियान की शुरुआत की और साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर संपर्क करने की अपील की।
लेकिन इस पहल के बीच बड़ा सवाल यह है कि सिर्फ जागरूकता अभियानों से साइबर ठगी पर कितनी प्रभावी रोक लग पाएगी? जब ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं और ‘डिजिटल अरेस्ट’, फर्जी कॉल, लिंक और ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामले सामने आ रहे हैं, तो क्या मौजूदा साइबर सुरक्षा व्यवस्था आम नागरिकों को पर्याप्त सुरक्षा दे पा रही है?
कार्यक्रम में सामने आया एक मामला इस चुनौती की गंभीरता को भी दिखाता है। एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति ने बताया कि समय रहते पुलिस से संपर्क करने पर 60 लाख रुपये की राशि वापस मिल सकी। सवाल यह है कि जिन पीड़ितों को समय पर पुलिस तक पहुंचने की जानकारी नहीं मिलती, उनकी रकम वापस कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
सरकार और पुलिस की ओर से गांव-गांव तक साइबर जागरूकता पहुंचाने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह भी सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या ‘साइबर संकल्प’ की जानकारी वास्तव में ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्गों और डिजिटल तकनीक से कम परिचित लोगों तक पहुंच पाएगी?
साइबर अपराध के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में चुनौती केवल लोगों को जागरूक करने की नहीं, बल्कि ठगी की रकम को तत्काल रोकने, अपराधियों तक पहुंचने और पीड़ितों को समय पर मदद उपलब्ध कराने की भी है।
‘साइबर संकल्प’ की शुरुआत निश्चित रूप से एक पहल है, लेकिन असली परीक्षा इसकी पहुंच और साइबर अपराधों पर इसके वास्तविक असर की होगी।