Skip to main content

AAJ24

[state_mirror_header]

खामोशी टूटी, आवाजों से जुड़ा बचपन: डोंगरगढ़ की जीविका का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट,

Priyanshu Ranjan

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) की पहल से जन्मजात श्रवण बाधिता से जूझ रही बच्ची को मिली नई जिंदगी, आरबीएसके टीम की सतर्कता बनी उम्मीद की किरण

रायपुर, 03 अगस्त 2026। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम डुंडेरा की नन्हीं जीविका के जीवन में अब नई उम्मीद की शुरुआत हुई है। जन्मजात श्रवण बाधिता के कारण अब तक वह न तो दुनिया की आवाजें सुन पाती थी और न ही सामान्य बच्चों की तरह बोल पाती थी। परिवार के लिए यह चिंता का विषय था, लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत समय पर हुई पहचान, विशेषज्ञों की देखरेख और एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट ने उसके भविष्य को नई दिशा दे दी है।

- Advertisement -

खामोशी टूटी, आवाजों से जुड़ा बचपन: डोंगरगढ़ की जीविका का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट

- Advertisement -

जीविका की श्रवण समस्या का पता आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1, ग्राम डुंडेरा में आयोजित नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चला। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की डोंगरगढ़ टीम-ए ने बच्ची की जांच कर उसकी स्थिति को गंभीरता से लिया और बिना विलंब आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण कराए। इसके बाद विशेषज्ञों की सलाह पर उसे एम्स रायपुर रेफर किया गया।

एम्स रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक जीविका का कॉक्लियर इम्प्लांट किया। यह अत्याधुनिक तकनीक उन बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो जन्मजात श्रवण बाधिता से प्रभावित हैं। ऑपरेशन के बाद अब जीविका नियमित स्पीच थेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम से जुड़ चुकी है। चिकित्सकों का मानना है कि निरंतर अभ्यास और परिवार के सहयोग से वह धीरे-धीरे आवाजों को पहचानना और सामान्य बच्चों की तरह बोलना सीख सकेगी।

See also  कबीरधाम दौरे पर रहेंगे सीएम साय, चुनावी रणनीति को लेकर कांग्रेस लेगी बैठकें

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) प्रदेश के हजारों बच्चों के लिए जीवन बदलने वाला अभियान बन चुका है। इस योजना के तहत जन्मजात विकार, पोषण संबंधी समस्याएं, विकास में देरी, श्रवण एवं दृष्टि संबंधी विकार सहित विभिन्न गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार कराया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को एम्स सहित अन्य उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर कर आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जीविका की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच हो और बीमारी की समय पर पहचान कर उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए, तो उनका भविष्य पूरी तरह बदला जा सकता है। डोंगरगढ़ की आरबीएसके टीम की सतर्कता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कुशलता और शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के समन्वय ने एक मासूम बच्ची के जीवन में नई रोशनी और नई आवाजें भर दी हैं।

आज जीविका के घर में सिर्फ मुस्कान ही नहीं, बल्कि उम्मीदों की नई गूंज भी सुनाई देने लगी है। उसकी कहानी यह संदेश देती है कि समय पर स्वास्थ्य जांच और सरकारी योजनाओं का लाभ बच्चों के जीवन को नई दिशा दे सकता है।

Share This Article