11 जुलाई से था लापता, परिजनों ने तलाश में लापरवाही का लगाया आरोप; पुलिस बोली– साइबर ठगी का प्रयास भी जांच के दायरे में
अंबिकापुर, 28 जुलाई 2026। सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित महामाया पहाड़ से मिले एक सड़े-गले शव की पहचान 11 जुलाई से लापता मायापुर निवासी 37 वर्षीय शुभम कश्यप के रूप में हुई है। शव की पहचान के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। परिजनों का दावा है कि शुभम के लापता रहने के दौरान उनके मोबाइल पर एक संदेश आया था, जिसमें उसे एक युवती के पास होने की बात कहकर एक लाख रुपए की मांग की गई थी। वहीं पुलिस प्रारंभिक जांच में इसे साइबर ठगी का प्रयास मान रही है, लेकिन मौत के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले वन विभाग के कर्मचारियों ने महामाया पहाड़ पर एक पेड़ से फंदे पर लटका सड़ा-गला शव देखा और इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। लगातार बारिश और कई दिनों तक खुले में शव पड़े रहने के कारण उसका निचला हिस्सा बुरी तरह गल चुका था। घटनास्थल से चप्पल, कपड़े और कुछ दवाइयां भी बरामद हुई हैं, जिन्हें जांच के लिए जब्त किया गया है।
शुभम कश्यप 11 जुलाई से लापता था। परिजनों ने 13 जुलाई को कोतवाली थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। शव मिलने की सूचना पर पहुंचे परिजनों ने कपड़ों और कंधे पर बने टैटू के आधार पर उसकी पहचान की।
नशे की लत छुड़ाने की कोशिश के बाद हुआ था लापता
परिजनों के अनुसार शुभम नशे का आदी था। 10 जुलाई को उसे समझाने और नशे की आदत छुड़ाने के उद्देश्य से परिवार के लोग उसे कोतवाली थाना भी लेकर गए थे, ताकि पुलिस की समझाइश का उस पर असर पड़े। अगले ही दिन वह घर से निकला और फिर वापस नहीं लौटा।
एक लाख रुपए की मांग वाला मैसेज बना जांच का अहम बिंदु
शुभम की मां ने बताया कि कुछ दिन पहले उनके मोबाइल पर एक संदेश आया था, जिसमें लिखा था कि शुभम एक युवती के पास है और यदि उसे वापस लाना है तो एक लाख रुपए की व्यवस्था करनी होगी। परिवार ने इसकी जानकारी तत्काल पुलिस को दी थी।
कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत सिन्हा ने बताया कि गुमशुदगी के मामलों में इस तरह के फर्जी कॉल और संदेश पहले भी सामने आ चुके हैं। साइबर सेल से जांच कराने पर यह प्रथम दृष्टया ठगी का प्रयास प्रतीत हुआ है। हालांकि पुलिस किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही है और हर पहलू की जांच जारी है।
परिजनों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल
मामले में परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि गुमशुदगी दर्ज होने के बाद यदि शुरुआती दिनों में व्यापक स्तर पर तलाश अभियान चलाया जाता, तो मामले की सच्चाई पहले सामने आ सकती थी। उनका कहना है कि खोजबीन में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।
फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है।