पात्र-अपात्र सूची जारी, 20 जुलाई तक दावा-आपत्ति आमंत्रित; अभ्यर्थियों ने अंक निर्धारण, अनुभव सत्यापन और चयन प्रक्रिया पर मांगा जवाब
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग की संविदा भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। मिशन शक्ति योजना के तहत महिला सशक्तिकरण केंद्र के लिए जेंडर विशेषज्ञ, आईटी कोऑर्डिनेटर और पीएमएमवीवाई डाटा एंट्री ऑपरेटर के पदों पर भर्ती शुरू होते ही पिछले वर्ष की भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं।
विभाग ने 10 जुलाई 2026 को तीनों पदों की पात्र-अपात्र सूची जारी कर 20 जुलाई तक दावा-आपत्ति आमंत्रित की है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों की मेरिट, पात्रता और अंकों का विवरण भी प्रकाशित किया गया है। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल सूची जारी कर देना पारदर्शिता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सबसे बड़ा सवाल— पिछले वर्ष डाटा एंट्री ऑपरेटर का पद क्यों हुआ था निरस्त?
भर्ती प्रक्रिया में सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि पिछले वर्ष डाटा एंट्री ऑपरेटर का पद किस कारण निरस्त किया गया था। विभाग ने आज तक इस संबंध में कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया। अब उसी पद पर दोबारा भर्ती शुरू होने से अभ्यर्थियों के बीच संदेह और गहरा गया है।
यदि पद किसी तकनीकी कारण से निरस्त किया गया था तो आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? यदि किसी शिकायत के कारण प्रक्रिया रोकी गई थी तो उसकी जांच रिपोर्ट अब तक सामने क्यों नहीं आई? इन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलने से भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या केवल सूची जारी करना ही पारदर्शिता है?
अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि—
प्रत्येक अभ्यर्थी को कितने अंक और किस आधार पर दिए गए?
अनुभव प्रमाण-पत्रों का सत्यापन किस प्रक्रिया से हुआ?
किन कारणों से आवेदकों को अपात्र घोषित किया गया?
चयन समिति ने किस आधार पर अंतिम निर्णय लिया?
‘प्रभावशाली लोगों को लाभ’ की चर्चा, लेकिन पुष्टि नहीं
भर्ती प्रक्रिया को लेकर विभाग के भीतर और बाहर यह चर्चा भी है कि प्रभावशाली लोगों के परिजनों को लाभ पहुंचाने की कोशिश होती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यदि ऐसी आशंकाएं लगातार उठ रही हैं तो विभाग पर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
प्रदेश के कई जिलों से पहले भी उठ चुके हैं सवाल
सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर सहित कई जिलों में समय-समय पर महिला एवं बाल विकास विभाग की संविदा नियुक्तियों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। अभ्यर्थियों ने अनुभव प्रमाण-पत्र, मेरिट, अंक निर्धारण और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन अधिकांश मामलों में जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए।
अनुभव प्रमाण-पत्रों के सत्यापन पर भी उठे सवाल
संविदा भर्ती में अनुभव के अंक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि—
क्या संबंधित संस्थानों से अनुभव प्रमाण-पत्रों का लिखित सत्यापन कराया गया?
क्या वेतन भुगतान, उपस्थिति और सेवा अवधि का मिलान किया गया?
या केवल दस्तावेजों के आधार पर अंक प्रदान कर दिए गए?
दावा-आपत्ति प्रक्रिया केवल औपचारिकता न बने
अभ्यर्थियों का कहना है कि दावा-आपत्ति प्रक्रिया का उद्देश्य केवल सूची प्रकाशित करना नहीं, बल्कि वास्तविक त्रुटियों का सुधार होना चाहिए। यदि प्राप्त आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
सरकार से उठ रहे प्रमुख सवाल
पिछले वर्ष डाटा एंट्री ऑपरेटर का पद क्यों निरस्त किया गया?
उस निर्णय का आदेश और कारण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
क्या अनुभव प्रमाण-पत्रों का स्वतंत्र सत्यापन हुआ?
क्या चयन समिति की कार्यवाही सार्वजनिक की जाएगी?
क्या सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिला?
क्या शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?
सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता निष्पक्षता, पारदर्शिता और योग्यता पर आधारित होती है। यदि भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं, तो संबंधित विभाग के लिए तथ्यों के साथ स्पष्ट जवाब देना आवश्यक है। यदि इस मामले में विभाग, चयन समिति या किसी संबंधित अधिकारी का पक्ष प्राप्त होता है, तो पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुसार उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।