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विधायक बनाम ब्यूरोक्रेसी: छत्तीसगढ़ में कलमबंद महासंग्राम, नायब तहसीलदार से मारपीट के बाद पूरे प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था ठप्प,

Priyanshu Ranjan

आज 1 जून से प्रदेशभर में कामबंद और कलमबंद आंदोलन, ठप्प हुए राजस्व और न्यायिक काम

अंबिकापुर / रायपुर (आज24.in)। छत्तीसगढ़ में खाकी और खादी के बीच का टकराव अब एक बड़े प्रशासनिक संकट में बदल चुका है। सरगुजा जिले के मैनपाट (राजापुर उपतहसील) में पदस्थ नायब तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट तुषार मानिक के साथ हुई बेरहमी से मारपीट और अभद्रता के मामले ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है।

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​सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने आज, 1 जून से आर-पार की जंग का ऐलान करते हुए प्रदेशव्यापी सामूहिक अवकाश, कामबंद और कलमबंद आंदोलन शुरू कर दिया है। अधिकारियों के इस कड़े रुख से राज्य भर में सरकारी मशीनरी पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है।

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​क्या है पूरा मामला और क्यों भड़का गुस्सा:

यह पूरा विवाद बीते 27 मई को हुई एक हिंसक घटना से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, सीतापुर से विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन एक फाइल पर हस्ताक्षर कराने राजापुर उपतहसील कार्यालय पहुंची थीं। इसी दौरान नायब तहसीलदार द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद वहां बहस शुरू हो गई, जिसके बाद उन्हें कार्यालय से बाहर जाने को कहा गया।

विधायक रामकुमार टोप्पो की गिरफ्तारी की मांग तेज, आज से कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल

​यह कहासुनी कुछ ही देर में इतनी उग्र हो गई कि विधायक रामकुमार टोप्पो समेत उनके समर्थकों ने कार्यालय में घुसकर नायब तहसीलदार की बेरहमी से पिटाई कर दी और उनके कपड़े तक फाड़ डाले। घटना के बाद पीड़ित अधिकारी ने अम्बिकापुर कोतवाली थाने पहुंचकर मामला दर्ज कराया था।

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यह प्रशासनिक गरिमा पर सीधा आघात है:

कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ का कहना है कि यह हमला सिर्फ एक अधिकारी पर नहीं, बल्कि समूची न्यायिक व्यवस्था पर सीधा आघात है। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक प्रदेश के सभी तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कार्यपालक मजिस्ट्रेट अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। अधिकारियों का तर्क है कि इस तरह के मामलों में त्वरित कार्रवाई न होना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, जिससे निष्पक्ष काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा और कार्यस्थलों पर भय का माहौल बनेगा।

आंदोलन को मिला चौतरफा समर्थन, जनता परेशान:

अब इस आंदोलन की आग पूरे प्रदेश में फैल चुकी है। छात्रावास अधीक्षक संघ और राजस्व पटवारी संघ ने भी इस बर्बर घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए तहसीलदारों का पुरजोर समर्थन किया है।

​इस जमीनी विवाद ने अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप अख्तियार कर लिया है। जमीन की रजिस्ट्री, जाति-निवास प्रमाण पत्र, राजस्व मामलों की सुनवाई से लेकर तमाम सरकारी और न्यायिक काम पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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