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हसदेव में नए कोल ब्लॉक पर बढ़ा विवाद: टीएस सिंहदेव ने FAC को भेजे दस्तावेज, केते एक्सटेंशन परियोजना रद्द करने की मांग

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) की 8 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित बैठक में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित तथा अदानी समूह के एमडीओ वाली केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक परियोजना को वन स्वीकृति देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाना है।
इसी बीच छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री T. S. Singh Deo ने वन सलाहकार समिति के सदस्यों को ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से दस्तावेज भेजकर परियोजना को खारिज करने की मांग की है। उन्होंने समिति के सदस्यों से फोन पर भी चर्चा कर पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को गंभीरता से देखने की अपील की है।

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7 लाख पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय संकट की आशंका

टीएस सिंहदेव ने अपने दस्तावेजों में दावा किया है कि प्रस्तावित खनन परियोजना के लिए करीब 1,742.155 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिससे लगभग 7 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई होगी।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र घने और पुराने प्राकृतिक जंगलों का हिस्सा है तथा यहां खनन गतिविधियां शुरू होने से Hasdeo Aranya क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ेगा।

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उनका कहना है कि हसदेव नदी, बांगो जलाशय और क्षेत्र की जैव विविधता पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। लगातार जंगल कटाई और खनन के कारण भविष्य में पूरा इलाका पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ सकता है।

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हाथी कॉरिडोर और लेमरू अभ्यारण्य का मुद्दा भी उठाया

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र हाथियों के आवागमन और निवास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह क्षेत्र Lemru Elephant Reserve के बफर जोन में स्थित है।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद से क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। यदि नई खनन परियोजना को मंजूरी दी जाती है तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

विधानसभा प्रस्ताव और सुप्रीम कोर्ट के शपथ पत्र का हवाला

टीएस सिंहदेव ने वन सलाहकार समिति को यह भी याद दिलाया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में हसदेव अरण्य क्षेत्र में नई कोयला खदानों को रद्द करने के पक्ष में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक शपथ पत्र का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि वर्तमान में संचालित खदानों में लगभग 350 मिलियन टन कोयला भंडार उपलब्ध है। यह भंडार अगले करीब 20 वर्षों तक संबंधित बिजली संयंत्रों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त माना गया है। ऐसे में नई खदान की आवश्यकता नहीं बताई गई।

WII और ICFRE रिपोर्ट का हवाला देकर ‘नो-गो एरिया’ घोषित करने की मांग

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून की 2021 की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी नई खदानों के लिए केते एक्सटेंशन क्षेत्र को “नो-गो एरिया” घोषित करने की सिफारिश की गई थी।

इसके साथ ही उन्होंने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। रिपोर्ट में “चोरनाई वाटरशेड” क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई थी, क्योंकि यह Hasdeo River का महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र है।
उन्होंने दावा किया कि केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी वाटरशेड क्षेत्र में आता है।

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रामगढ़ की ऐतिहासिक गुफाओं और पहाड़ियों पर खतरे की आशंका

टीएस सिंहदेव ने समिति को भेजे दस्तावेजों में यह भी उल्लेख किया है कि खनन गतिविधियों के कारण रामगढ़ पहाड़ियों में दरारें आने लगी हैं। यह क्षेत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारकों में शामिल है।

उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना रिपोर्ट में रामगढ़ पहाड़ियों की दूरी 10 किलोमीटर से अधिक बताई गई है, जबकि वास्तविक एरियल दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। उनका कहना है कि दूरी की गणना सबसे दूर वाले हिस्से से की गई, जबकि पहाड़ियों के निकटवर्ती हिस्से और प्राचीन गुफाएं खदान क्षेत्र के काफी करीब स्थित हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खनन गतिविधियां जारी रहीं तो रामगढ़ की ऐतिहासिक गुफाओं और मंदिरों को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजे गए दस्तावेज

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को भी दस्तावेजों की प्रतियां भेजी गई हैं। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रामगढ़ स्थल, हसदेव अरण्य के जंगलों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए वन सलाहकार समिति को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।

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