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दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची! सरगुजा के सुलपगा गांव में हुई अनोखी शादी, दूल्हे की विदाई और ‘घर जमाई’ बना दूल्हा,,,

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर (सरगुजा)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची। पारंपरिक रीति-रिवाजों को तोड़ते हुए ‘मसी’ परंपरा के तहत यह अनोखी शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। सबसे खास बात – शादी के बाद दूल्हे की विदाई हुई और दूल्हा घर जमाई बनकर दुल्हन के घर चला गया।

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दुल्हन देवमुनि एक्का के पिता मोहन एक्का ने aaj24.in को बताया, “हमारे परिवार में चार बेटियां हैं, कोई बेटा नहीं। परिवार के सहारे के लिए हमने यह फैसला लिया। मैं खुद बारात लेकर दूल्हे बिलासुस बरवा के घर पहुंचा और पूरी रस्में निभाईं।”

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शादी में कन्यादान की जगह वरदान की रस्म पूरी की गई। दहेज की प्रथा से पूरी तरह परहेज रखा गया। शादी स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार ही संपन्न हुई।

दूल्हे की विदाई का भावुक मंजर

शादी के बाद जब दूल्हे की विदाई हुई तो बिलासुस बरवा भावुक होकर रो पड़ा। यह दृश्य वहां मौजूद सभी लोगों के लिए अनोखा और दिल छू लेने वाला रहा।

घर जमाई बनेगा दूल्हा

मोहन एक्का ने कहा, “दूल्हे को हम अपने घर ले जा रहे हैं। वह बेटे की तरह रहेगा और परिवार का सहारा बनेगा।”

चुमान’ परंपरा का पालन

बारात में शामिल महेश तिर्की ने बताया कि उनके समाज में ‘चुमान’ परंपरा है, जिसमें लड़के पक्ष की ओर से दहेज दिया जाता है। इस शादी में भी उसी परंपरा का पालन किया गया।

लड़के पक्ष के लिए पहला अनुभव

दूल्हे की मां उर्मिला बरवा ने कहा, “हमारे लिए यह पहला मौका था। लड़की पक्ष बारात लेकर आया और दूल्हा घर जमाई बनकर गया – सब हैरान रह गए।”

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समाज में नई सोच की बहस

दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंचने वाली यह अनोखी शादी अब पूरे सरगुजा क्षेत्र में नई सोच और सामाजिक बदलाव की मिसाल बन गई है। लोग इसे बेटियों के सशक्तिकरण और परिवार की जरूरत के मुताबिक लिया गया सकारात्मक कदम मान रहे हैं।

सरगुजा की यह अनोखी शादी सिर्फ दो परिवारों की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए नई मिसाल है।

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