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भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए CM साय ने की हाई लेवल रिव्यू मीटिंग, निष्पक्षता के दिए निर्देश

Priyanshu Ranjan

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ भर्ती परीक्षाओं को पूरा कराने के लिए उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की.

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छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षाओं को लेकर CM विष्णु देव साय ने हाई लेवल रिव्यू मीटिंग की. उन्होंने मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर प्रदेश में आयोजित हो रही विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की व्यापक समीक्षा की. बैठक का मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध ढंग से संपन्न कराना है. इस दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे.

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पारदर्शी ढंग से आयोजित की जाएं परीक्षाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि युवा कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, इसलिए शासन की प्रतिबद्धता है कि उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो. उन्होंने निर्देश दिए कि सभी भर्ती परीक्षाएं पारदर्शी ढंग से आयोजित की जाएं तथा परीक्षा प्रणाली को वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ किया जाए. उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता स्वीकार्य नहीं होगी और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

चयन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि परीक्षाओं की शुचिता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे. इसके लिए पारदर्शिता बढ़ाने संबंधी सभी उपायों पर गंभीरतापूर्वक कार्य किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है. इससे राज्य में भर्ती प्रणाली अधिक सरल, न्यायोचित और समयबद्ध बनेगी. बैठक में पुलिस बल सहित विभिन्न विभागों में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की गई और चयन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए.

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बैठक में समान अहर्ता वाले पदों के लिए विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित किए जाने की वर्तमान व्यवस्था पर भी चर्चा हुई. समान पात्रता वाले पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया. इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि विभागों को समय पर मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सकेगा. वहीं, PSC की परीक्षा प्रणाली को और अधिक समकालीन, पारदर्शी तथा अभ्यर्थी हितैषी बनाने के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई. यह भी विचार किया गया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को वर्तमान आवश्यकताओं एवं समसामयिक विषयों के अनुरूप और अधिक प्रासंगिक बनाया जाए.

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