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कानाफुंसी ; आखिर क्या है थप्पड़ कांड का सच।

Priyanshu Ranjan

जिला ब्यूरो रिपोर्ट

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रतलाम/काले कोटवालों के ऑफिस में एक घटना घटित हुई जैसे की हमारी खबर में बताया भी गया जब सूत्रों के हवाले से हमने पड़ताल करी की पूरी घटना का आखिर सच क्या है तो पता चला मातृ शोक में डूबे टिंगू जी जैसे ही उससे बाहर आए फिर से अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को परेशान करने लग गए अब कर्मचारी इतने परेशान हो गए थे कि जिस कार्य को टिंगू जी कुछ महीने पहले तक कर रहे थे अब इस कार्य को अधीनस्थ कर्मचारी कर रहे हैं मामला शुरू हुआ ड्यूटी ऑन ऑफ को लेकर पहले तो टिंगू जी खुद ही दूसरे कर्मचारियों को ज्ञान बांटते थे लेकिन आज खुद जब उस कुर्सी पर बैठ गए तो जी एम एच के चक्कर में सबको परेशान कर रहे हैं मुख्य बात यह है कि टिंगू जी से सब इतने त्रस्त हो गए की गाड़ी बदलने के नाम पर जबरन का कर्मचारियों को परेशान किया जाता है मुख्य बात इस झगड़े की यह थी कि अगर टिंगू जी को पहले से पता था कि उक्त व्यक्ति अपनी नौकरी पर नहीं गया तो उन्होंने अपने उच्च अधिकारी को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी तथा बाद में ही टिंगू जी क्यों बहस करने लगे वैसे यह आदत टिंगू जी की पुरानी है और हो भी क्यों ना जिसका ब्लड ग्रुप नेगेटिव होगा वह ह्यूमन नेचर के कारण इसी तरह का व्यक्तित्व होगा जैसे ही यह विवाद हुआ वैसे ही लंबू जी इस विभाग के सबसे बड़े नारद और टिंगू जी दोनों भाग गए मुखिया के पास और मुखिया जी को झूठी कहानी सुना कर कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया जिसमें एक कर्मचारी के रिटायरमेंट में मैच कुछ समय बाकी है अब साथ वालो पर दया ही नहीं दिखाई जबकि टिंगू जी जिस कुर्सी पर बैठे है उस बैठने वाले ड्यूटी लगाने वाले अपने विभाग के कर्मचारियों के लिए ढाल का कार्य करते थे लेकिन यहां तो टिंगू जी साथ वालो पर तलवार लेकर हाजिर है टिंगू जी अब सारी हदें पार करते नजर आ रहे हैं और इसका खामियाजा आगे भी उठाना पड़ सकता है इस एक तरफा कार्यवाही से बाकी के कर्मचारियों में रोष व्याप्त है और एकता हो गई और अब कोई भी जबरन का परेशान नहीं होगा और ना ही गाड़ी बदलने के नाम पर और गाड़ी लगाने के नाम पर 500 से 1000 रुपए और सोम रस की बॉटल ला कर देगा।

आखिरकार मुखिया जी को यह सोचना चाहिए कि उनके कार्यकाल में यह दूसरा थप्पड़ कांड है और रेलवे की ट्रेड यूनियन को भी संज्ञान लेना चाहिए कि एक थप्पड़ कांड में आप सब ऑफिस में पहुंच गए थे इस वाले थप्पड़ कांड में चुप क्यों है क्यों इस विभाग में सिर्फ दलित वर्ग पर अत्याचार हो रहा है।

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बड़े बूढ़े जैसा की कह गए हैं की जैसा आप कर्म करोगे उस कर्म की सजा आपको इस जन्म में ही भोगना है वैसा ही वाक्या दो दिन पहले हुआ थप्पड़ कांड के बाद टिंगू जी को अपने उस सीनियर की याद जरूर आई होगी जिसको की टिंगू जी ने षडयंत्र पूर्वक झूठे केस में उलझा दिया था और वह व्यक्ति दर बदर भटकता रहा फरार रहा चिंता में रहा और अंततः परलोक सिधार गया लेकिन वही कर्म अब टिंगू जी के आड़े आ गए टिंगू जी को कलम के जादूगरों को खबर देने का बहुत पुराना शौक है और खुद के थप्पड़ खाने की झूठी खबर भी खुद ही ने बैठ कर बताई लेकिन यह छुपा गए कि पहला थप्पड़ खुद ने मारा था, अब रही बात फ्री लाने ओर ले जाने वाली बात तो उसका खुलासा यू हुआ कि इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी कोचिंग वाले शहर में एक शराब ठेकेदार से टिंगू जी सस्ती शराब मंगवाते है और उन्हीं ठेकेदार के लोगों को कोचिंग वाले शहर से लेकर भारत की राजधानी तक फ्री में ac की यात्रा करवाते हैं आज टिंगू जी सारे जूठे हथकंडे अपना रहे हैं पर सारे काम उनके आणे आ रहे हैं, अब देखना है टिंगू जी कब खाकी के सामने आत्मसमर्पण करते हैं और उसके बाद न्यायालय क्या न्याय करता है।

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जैसा कि हमने पहले एक संस्मरण में लिखा था कि उतना ही सितम करो जितना स्वयं सह सको।

आशिक आवारा स्वच्छ शहर में फैला रहे गंदगी पर यह भूल गए की कभी इस विभाग से खुद के मुखिया का भी जुड़ाव रहा।

सूत्र बताते हैं कि आज भारत के सबसे स्वच्छ शहर में आशिक आवारा जी ने अपनी गंदगी बखूबी फैला रखी है जहां उन्होंने दिन के दयाल और कृपा के शंकर को परेशान कर रखा है वह यह भूल गए कि यह लोग कभी आशिक आवारा जी के मुखिया के साथ जूनियर हुआ करते थे और आज आशिक आवारा जी नौकरी भी मुखिया के परलोक सिधारने पर मिली है और आज उन्हीं लोगों को आशिक आवारा अपने षड्यंत्र भरे दिमाग को चलाकर परेशान कर रहे हैं जब कोई चीज तोहफे में मिलती है तो व्यक्ति इसी तरह घमंड में आ जाता है अगर देखा जाए तो आशिक आवारा खुद की काबिलियत पर किसी प्राइवेट बैंक में क्लर्क भी नहीं बन सकते हैं यही कहानी टिंगू जी की भी है इनको तो कोई पानी पिलाने में भी नहीं रखता ।अब स्वच्छ शहर में गंदगी फैलाने का आशिक आवारा जी का क्या उद्देश्य है यह तो पता नहीं लेकिन अगर यह सब अब बंद नहीं हुआ तो यह आग आज रेलवे के बाहर के कुछ अखाड़े में भी फैल रही है और जिसे बुझाने में आशिक आवारा जी को समस्या आ सकती है।

याद रखना ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती

 

यहां के मुखिया को भी सोचना चाहिए कि अब ज्यादा

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कंबल ओढ़ कर घी ना पिए और आंखें खोल कर सब कार्य करें।
अति सर्वत्र वर्जते

 

अगले अंक में ओर भी बहुत रोचक तथ्य आपके सामने लेकर आएंगे।

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