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उज्जैन/सबसे पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर में जलाई गई होली ; संध्या आरती में भगवान को हर्बल गुलाल अर्पण,रंग-गुलाल ले जाना व उड़ाना पूर्णतः प्रतिबंधित

Bharat Sharma

भरत शर्मा की रिपोर्ट 

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चंद्रग्रहण के कारण भोग आरती में केवल शक्कर का भोग अर्पित होगा

IMG 20260302 WA0066 scaledउज्जैन, 03 मार्च श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को संध्या के समय होली का पर्व मनाया गया। नैवेद्य कक्ष में श्री चन्द्रमोलेश्वर भगवान, कोटितीर्थ कुण्ड पर श्री कोटेश्वर-श्री रामेश्वर व सभा मण्डप में श्री वीरभद्र को गुलाल अर्पण करने के पश्चात संध्या आरती में भगवान श्री महाकालेश्वर को परम्परानुसार शक्कर की माला धारण करवाने के पश्चात हर्बल गुलाल अर्पित किया गया

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श्री महाकालेश्वर भगवान जी की संध्या आरती के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में ओंकारेश्वर मंदिर के समक्ष मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा द्वारा विश्व मे सबसे पहले प्रज्जवलित होने वाली कण्‍डों व लकडी से निर्मित होलिका का विधिवत पूजन- आरती किया। पूजन के अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशनकुमारसिंह भी शामिल हुए। इसके उपरांत होलिका दहन किया गया। मंदिर प्रबंध समिति के जनसंपर्क अधिकारी एवं नायब तहसीलदार आशीष पलवाडिया ने बताया कि इससे पूर्व दिन में मंदिर में प्रतिवर्ष परंपरा अनुसार रंगपंचमी पर्व पर श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह के लिए सभा मंडप में भगवान श्री वीरभद्र के पूजन के उपरांत ध्वजों का पूजन किया गया।

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भगवान श्री महाकाल को मंगलवार को धुलेंडी के दिन तडके होने वाली भस्मार्ती में मंदिर के पुजारी एवं पुरोहितों द्वारा हर्बल गुलाल अर्पित किया जावेगा। त्रिकाल आरती के दौरान प्रत्येक आरती में 01-01 किलोग्राम हर्बल गुलाल प्रतीकात्मक रूप से अर्पित किया जाएगा। यह हर्बल गुलाल मंदिर की कोठार शाखा द्वारा भस्म आरती पुजारी, शयन आरती पुजारी एवं शासकीय पुजारी को उपलब्ध कराया जाएगा।

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मंगलवार को चंद्रग्रहण के कारण मंदिर की प्राचीन परंपरा अनुसार मंदिर की पूजा पद्धति में परिवर्तन रहेगा। शाम 6:32 से 6:46 तक रहने वाले 14 मिनट के ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेद काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के पश्चात मंदिर में शुद्धिकरण,भगवान का स्नान पूजन के पश्चात भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी।

अगले दिन बुधवार से परम्परानुसार आरतियों के समय में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से अश्विन पूर्णिमा तक परिवर्तन होगा। प्रथम भस्मार्ती – प्रातः 04:00 से 06:00 बजे तक, द्वितीय दद्योदक आरती प्रातः 07:00 से 07:45 बजे तक, तृतीय भोग आरती प्रातः 10:00 से 10:45 बजे तक, चतुर्थ संध्या पूजन सायं 05:00 से 05:45 बजे तक, पंचम संध्या आरती सायं 07:00 से 07:45 बजे व शयन आरती रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक होगी।

भस्मार्ती, संध्या पूजन एवं शयन आरती अपने निर्धारित समय पर होंगी। भगवान श्री महाकालेश्वर का ध्वजचल समारोह इस वर्ष 08 मार्च को रंगपंचमी के अवसर पर परंपरानुसार निकाला जावेगा। मंदिर में होलिका पर्व पर 02-03 मार्च को मंदिर की परंपराओं के सम्यक निर्वहन हेतु मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासन द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि गर्भगृह, नंदी मंडपम्, गणेश मंडपम्, कार्तिकेय मंडपम् सहित संपूर्ण मंदिर परिसर एवं महाकाल लोक क्षेत्र में किसी भी प्रकार का रंग-गुलाल ले जाना, रंग उड़ाना, आपस में रंग लगाना अथवा किसी विशेष उपकरण से रंग उड़ाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

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