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सूरजपुर में “समकालीन भारत में डिजीटल नागरिक सहभागिता और समावेशी विकास’’ विषय पर केंद्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी संपन्न,

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर । शासकीय रेवती रमण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय सूरजपुर के सभागार में ‘‘समकालीन भारत में डिजीटल नागरिक सहभागिता और समावेशी विकास’’ विषय पर केंद्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के कलेक्टर एस. जयवर्धन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

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       उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री जयवर्धन ने कहा कि तकनीकी ज्ञान का अधिकाधिक और समुचित उपयोग किसी भी देश, समाज एवं परिवार को सशक्त बनाता है। उन्होंने महानगर हैदराबाद से लेकर सुदूर ग्राम्यांचल बिहारपुर तक डिजिटल इंडिया की पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग और शासकीय सेवाओं में आधार लिंकिंग जैसी प्रक्रियाओं में नागरिकों की सहभागिता उल्लेखनीय है तथा डिजिटलीकरण ही हमें विकास के मार्ग पर अग्रसर कर सकता है।

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विशेषज्ञों ने रखे विचार-

       कार्यक्रम में इंदिरा गांधी जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. उदय प्रताप सिंह ने की- नोट स्पीकर के रूप में शोधार्थियों को डिजिटल आयामों पर नवाचार आधारित शोध के लिए प्रेरित किया। रिसोर्स पर्सन के रूप में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा (उत्तरप्रदेश) के प्राचार्य प्रो. सुभाष राम ने तकनीक के बदलते स्वरूप और उसके सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डाला। एमिनेंट स्पीकर के रूप में आर्या महिला महाविद्यालय, प्रयागराज के प्रो. अवधेश कुमार ने डिजिटल क्रांति में विद्यार्थियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए समावेशी विकास को आवश्यक बताया।

        अध्यक्षीय उद्बोधन और विशिष्ट वक्तव्य-प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं अपर संचालक उच्च शिक्षा डॉ. एस. एस.अग्रवाल ने कोरोना काल के दौरान संचार माध्यमों की उपयोगिता और रोजगार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।महाविद्यालय के जनभागीदारी अध्यक्ष यशवंत सिंह ने आमजन में डिजिटल माध्यमों के प्रति बढ़ती रुचि पर प्रसन्नता व्यक्त की।

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      द्वितीय सत्र की अध्यक्षता करते हुए कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य श्री बृजलाल साहू ने तकनीक के अंधाधुंध उपयोग से उत्पन्न संवादहीनता की आशंका की ओर ध्यान आकृष्ट किया।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एच. एन. दुबे ने कहा कि सामूहिक विकास के लिए डिजिटल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

आयोजन की रूपरेखा और सहभागिता-

       छत्तीसगढ़ शासन, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वित्त पोषित इस संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अखिलेश द्विवेदी ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।

       कार्यक्रम में पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलसचिव चन्द्रभूषण मिश्रा, प्रो. एस. एन. पांडेय, डॉ. रोजलिली बड़ा, डी. पी. कोरी, डॉ. प्रतिभा कश्यप, प्रो. रीता सिंह, डॉ. प्रियंका सिंह चंदेल एवं शोधार्थी सम्प्रति साहू सहित अनेक शिक्षाविदों ने डिजिटल सहभागिता के माध्यम से समन्वित विकास पर अपने विचार व्यक्त किए। वाड्रफनगर, राजपुर, रामानुजगंज, सरगुजा सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही । कार्यक्रम का संचालन डॉ. अखिलेश पांडेय, टी. आर. रहंगडाले एवं पूजांजली भगत ने किया।

डिजिटल सहभागिता से समावेशी विकास की ओर-

    राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में यह निष्कर्ष सामने आया कि डिजिटल तकनीक का सकारात्मक, संतुलित और सार्थक उपयोग ही समावेशी एवं समन्वित विकास की दिशा में ठोस कदम साबित हो सकता है। संगोष्ठी ने न केवल अकादमिक विमर्श को नई दिशा दी, बल्कि डिजिटल भारत के सपने को साकार करने में शिक्षा संस्थानों की भूमिका को भी रेखांकित किया।

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