नशीले इंजेक्शन का चेन का खुलासा नहीं होने पर विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे है सवाल
अंबिकापुर । संभागीय आबकारी उड़नदस्ता प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन कहे जाने वाले रंजीत गुप्ता की टीम ने एक बार फिर नशीले इंजेक्शनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गंगापुर स्थित श्याम लॉज से 20 नशीले इंजेक्शन के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी साहिल तिर्की के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(बी) के तहत कार्रवाई कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। विभाग का कहना है कि पूछताछ में इंजेक्शन उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के संबंध में जानकारी मिली है और उसकी तलाश की जा रही है।
मुखबिर की सूचना पर आबकारी टीम ने श्याम लॉज के कमरा नंबर 105 में दबिश दी, जहां से 10 नग नशीला टेबलेट और 10 नग नशीला इंजेक्शन बरामद किए गए।
कार्रवाई में आबकारी प्रधान आरक्षक अशोक सोनी तथा नगर सैनिक रणविजय सिंह और रोहित सोनवानी शामिल रहे। लेकिन इस कार्रवाई के साथ ही एक बार फिर वही सवाल खड़ा हो गया है,जो पिछले कई मामलों के बाद भी अनुत्तरित है।
लगातार कार्रवाई, लेकिन हर बार नया चेहरा :
पिछले कुछ समय में संभागीय आबकारी उड़नदस्ता ने लगातार कई बड़ी कार्रवाइयों का दावा किया है। वाहिद अंसारी की गिरफ्तारी और उसके बाद कथित सप्लायर मोशीम अंसारी तक पहुंच।
लुंड्रा क्षेत्र से दो कथित सप्लायरों की गिरफ्तारी।
सूरजपुर में प्रदीप राजवाड़े के पास से 42 नशीले इंजेक्शन की बरामदगी। कोरिया जिले में महुआ शराब पर बड़ी कार्रवाई।
होटल दीप में अवैध शराब बिक्री के मामले में छापेमारी।
और अब श्याम लॉज से साहिल तिर्की की गिरफ्तारी।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि विभाग सक्रिय है, लेकिन दूसरी ओर यह भी सामने आ रहा है कि हर कुछ दिनों में एक नया विक्रेता या कैरियर पकड़ में आ जाता है।
आखिर इंजेक्शन पहुंच कहां से रहे हैं?
हर मामले में बरामद होने वाले इंजेक्शन लगभग एक जैसे है
REXOGESIC और AVIL- हर गिरफ्तारी के बाद विभाग यह कहता है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और सप्लायर की तलाश जारी है।
लेकिन लगातार मामलों के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इन इंजेक्शनों की मूल सप्लाई चेन कहां से संचालित हो रही है।
क्या ये किसी वैध मेडिकल वितरण प्रणाली से बाहर निकल रहे हैं?
क्या किसी स्टॉकिस्ट, एजेंसी या संगठित नेटवर्क की भूमिका है?
क्या जब्त इंजेक्शनों के बैच नंबर के आधार पर सप्लाई चेन की विस्तृत जांच की जा रही है?
इन सवालों के जवाब अब भी सामने नहीं आए हैं।
लॉज भी बन रहे हैं अस्थायी ठिकाने?
श्याम लॉज से गिरफ्तारी ने एक और पहलू सामने रखा है।
क्या शहर के कुछ लॉज, धर्मशाला या किराये के कमरे ऐसे लोगों के अस्थायी ठिकाने बनते जा रहे हैं जो नशीले पदार्थों की बिक्री करते हैं?
यदि ऐसा है, तो क्या ऐसे प्रतिष्ठानों में ठहरने वालों का सत्यापन और निगरानी पर्याप्त है? यह भी जांच का विषय माना जा रहा है।
हर कार्रवाई के बाद वही दावा :
हर गिरफ्तारी के बाद विभाग यह कहता है कि ‘सप्लायर की तलाश जारी है’ और जल्द गिरफ्तारी होगी। जनता की अपेक्षा अब केवल एक और गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क का खुलासा है जो लगातार नए लोगों के माध्यम से नशीले इंजेक्शन बाजार तक पहुंचा रहा है। नशे के खिलाफ अभियान की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब केवल कैरियर और फुटकर विक्रेता ही नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन, वित्तीय नेटवर्क और बड़े संचालक भी कानून के दायरे में आएंगे।