सूरजपुर । छत्तीसगढ़ पुलिस के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम रविवार को कोरिया जिले के दौरे के बाद सूरजपुर पहुंचे। यहां उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, सीमावर्ती सुरक्षा तथा पुलिसिंग व्यवस्था से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में उन्होंने अधिकारियों को अपराधों की विवेचना पूरी पारदर्शिता, वैज्ञानिक तरीके और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर करने के निर्देश दिए, ताकि न्यायालय में आरोपियों को प्रभावी रूप से सजा दिलाई जा सके। बैठक में डीजीपी ने जिले में घटित गंभीर अपराधों की समीक्षा करते हुए उनकी जांच की वर्तमान प्रगति की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विवेचना तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए तथा जांच की गुणवत्ता ऐसी हो कि न्यायालय में अपराधियों के विरुद्ध मजबूत अभियोजन प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अपराध नियंत्रण केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाना ही पुलिस की वास्तविक सफलता है।
मध्य प्रदेश सीमा पर विशेष फोकस-
समीक्षा बैठक के दौरान मध्य प्रदेश से लगे सूरजपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष चर्चा की गई। डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमा क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए, नियमित एवं प्रभावी पेट्रोलिंग की जाए तथा अंतरराज्यीय समन्वय को और मजबूत बनाया जाए। उन्होंने कहा कि संदिग्ध गतिविधियों पर प्रारंभिक स्तर पर ही सतर्क निगरानी रखने से बड़ी आपराधिक घटनाओं को समय रहते रोका जा सकता है।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान किया जाए तथा सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय अपराधियों और संगठित आपराधिक गतिविधियों पर संयुक्त रणनीति के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग पर जोर–
डीजीपी अरुण देव गौतम ने अधिकारियों से कहा कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास तथा संवाद जितना मजबूत होगा, अपराध नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा। उन्होंने सामुदायिक पुलिसिंग को और मजबूत बनाने, आम नागरिकों से नियमित संवाद स्थापित करने तथा जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है और पुलिस को संवेदनशील, जवाबदेह तथा जनोन्मुखी कार्यशैली अपनानी चाहिए। स्थानीय स्तर पर लोगों से संवाद बढ़ाकर अपराधों की रोकथाम में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
अपराध नियंत्रण के लिए नई रणनीति पर चर्चा-
बैठक में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, गंभीर अपराधों की विवेचना, अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक पुलिसिंग और पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए तथा प्रत्येक गंभीर अपराध की लगातार मॉनिटरिंग की जाए।
दौरे के बाद अंबिकापुर के लिए हुए रवाना-
समीक्षा बैठक के पश्चात पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम अंबिकापुर के लिए रवाना हो गए। पुलिस विभाग के अधिकारियों का मानना है कि डीजीपी के इस दौरे से पुलिसिंग व्यवस्था में नई ऊर्जा आएगी तथा अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस बल का मनोबल भी मजबूत होगा।
बैठक में रहे उपस्थित-
इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) दीपक झा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रशांत सिंह ठाकुर,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन, एसडीओपी अभिषेक पैकरा (सूरजपुर), राजेश जोशी (ओड़गी), अनूप एक्का (प्रतापपुर), बर्नार्ड कुजूर (प्रेमनगर), रीना,नीलम सहित जिले के अन्य पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।