प्रयोगशाला से वंचित विद्यार्थियों तक पहुंचेंगे रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान और नई तकनीकों के प्रयोग,
रायपुर, 27 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को अब विज्ञान सीखने के लिए केवल किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज कैम्प कार्यालय बगिया में ‘साइंस ऑन व्हील्स’ वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह चलती-फिरती विज्ञानशाला स्कूलों तक पहुंचकर विद्यार्थियों को प्रयोगों, वैज्ञानिक मॉडलों और गतिविधियों के जरिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की व्यावहारिक समझ विकसित करने का अवसर देगी।
- प्रयोगशाला से वंचित विद्यार्थियों तक पहुंचेंगे रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान और नई तकनीकों के प्रयोग,
- किताबों से निकलकर प्रयोगशाला में उतरेगा विज्ञान
- चार मॉड्यूल में दिखेगी विज्ञान की नई दुनिया
- सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बच्चों को खुद प्रयोग करने का मौका
- ‘साइंस ऑन व्हील्स’ का लक्ष्य वैज्ञानिक सोच को बनाना स्थायी आदत
- छत्तीसगढ़ समेत तीन राज्यों में चल रही पहल
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस पहल का विशेष लाभ उन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को मिलेगा, जहां आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों और प्रयोगशालाओं तक पहुंच सीमित है। मोबाइल विज्ञानशाला के माध्यम से बच्चों को विज्ञान के सिद्धांतों को स्वयं प्रयोग करके समझने और सवालों के जवाब खोजने का अवसर मिलेगा।
किताबों से निकलकर प्रयोगशाला में उतरेगा विज्ञान
मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों में अपने आसपास की दुनिया को जानने-समझने की स्वाभाविक जिज्ञासा होती है। इस जिज्ञासा को वैज्ञानिक सोच, प्रयोग और नवाचार से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को किताबों में पढ़े विज्ञान को जब प्रयोगों के माध्यम से समझने का अवसर मिलता है, तो उनकी सीख अधिक प्रभावी होती है। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ विद्यार्थियों में सवाल पूछने, प्रयोग करने और समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान तलाशने की प्रवृत्ति विकसित करने में उपयोगी साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आज जीवन के लगभग हर क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। नई तकनीकों और नवाचार के दौर में विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही इनके व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराना उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
चार मॉड्यूल में दिखेगी विज्ञान की नई दुनिया
‘साइंस ऑन व्हील्स’ के जरिए विद्यार्थियों को मुख्य रूप से चार विषयगत मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा।
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से विद्यार्थी ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया को करीब से समझेंगे। रोबोटिक्स के जरिए उन्हें आधुनिक तकनीक, नवाचार और भविष्य के तकनीकी कौशल से परिचित कराया जाएगा।
वहीं सतत विकास मॉड्यूल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की समझ विकसित की जाएगी। जल निस्पंदन के प्रयोगों के जरिए विद्यार्थी स्वच्छ जल, जल संरक्षण और जल शुद्धिकरण से जुड़े वैज्ञानिक समाधानों को समझ सकेंगे।
सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बच्चों को खुद प्रयोग करने का मौका
इस पहल की खासियत यह है कि विद्यार्थी केवल वैज्ञानिक मॉडल देखकर आगे नहीं बढ़ेंगे, बल्कि उन्हें स्वयं प्रयोग करने और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा।
वैज्ञानिक मॉडल, प्रयोग और प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों में तार्किक सोच, समस्या-समाधान, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
‘साइंस ऑन व्हील्स’ का लक्ष्य वैज्ञानिक सोच को बनाना स्थायी आदत
इस परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक दिन या एक कार्यक्रम तक विज्ञान से जोड़ना नहीं, बल्कि उनके भीतर विज्ञान और तकनीक के प्रति लंबे समय तक रुचि पैदा करना है।
गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से बच्चों को स्वयं सवाल उठाने, उनके उत्तर तलाशने और नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे भविष्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर बेहतर exposure मिल सकेगा।
छत्तीसगढ़ समेत तीन राज्यों में चल रही पहल
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से संचालित इस राष्ट्रीय पहल को छत्तीसगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में लागू किया जा रहा है। परियोजना को प्लक्ष विश्वविद्यालय, IDYM फाउंडेशन और IIT मंडी के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में इस पहल के जरिए विशेष रूप से विद्यार्थियों तक व्यावहारिक विज्ञान शिक्षा पहुंचाने और उन्हें आधुनिक तकनीक एवं नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को मिलेगा बड़ा लाभ
‘साइंस ऑन व्हील्स’ उन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्हें अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों और तकनीकी संसाधनों का नियमित अवसर नहीं मिल पाता। मोबाइल विज्ञानशाला के स्कूलों तक पहुंचने से ऐसे विद्यार्थियों को भी प्रयोग आधारित सीखने का अनुभव मिलेगा।
यह पहल विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करने के साथ उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और ज्ञान-विज्ञान के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।




