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रतलाम न्यायालय का फैसला : कम्पनी के नाम पर लोगों से रुपए ऐंठने पर संचालिका अनीता दग्दी को 7 वर्ष की सजा,एक आरोपी दोषमुक्त व 56 हजार रुपए का जुर्माना

Priyanshu Ranjan

भरत शर्मा की रिपोर्ट

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रतलाम /राजस्थान के जयपुर की स्टेवल इन्फोटेक कंपनी रतलाम स्थित फ्रेंचाइजी शाखा कि संचालिका अनीता पति संजय दग्दी उम्र 49 वर्ष निवासी मालीकुआं को न्यायालय सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 406 में 03 वर्ष, धारा 420 में 07 वर्ष व म.प्र. निश्चेपो के हितों का संरक्षण अधिनियम कि धारा 06 में 06 वर्ष की सजा व 56 रुपए के जुर्माने से दंडित किया

प्रकरण में पैरवीकर्ता अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि आवेदक वसीम पिता उमर खान द्वारा 05 मार्च 2013 को थाना माणक चौक पर एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया किया था कि श्रीमती अनिता दग्दी को स्टेवेल इन्फोटेक जयपुर कंपनी के फ्रेंचाइजर के रूप में उपभोक्ताओं से कंपनी के लिए रूपये प्राप्त करने हेतु नियुक्त किया गया था। रतलाम स्थित कंपनी की समस्त गतिविधियां श्रीमती अनिता दग्दी द्वारा संचालित की जाती थी श्रीमती अनिता दग्दी द्वारा कंपनी की लोभ लुभावन स्कीम जनता को बताकर 25-50 हजार रूपये की वसूली की जाती थी।

जनता को गुमराह कर और लालच देकर नये सदस्यों की भर्ती कर चैनल चलाने का कार्य किया जाता था। कुछ दिनों से श्रीमती अनिता दग्दी का कोई अता-पता नहीं है। श्रीमती अनिता दग्दी द्वारा जनता से प्राप्त रूपये कंपनी के नाम से हड़पकर छल कारित कर उक्त रूपये कंपनी में जमा न करते हुए उन पैसों से कल्याण नगर कॉलोनी रतलाम में 2-3 मकान खरीद लिये है।

महिला अनिता दग्दी द्वारा जनता द्वारा पैसे मांगने पर उनके साथ गाली-गलौच की जा रही है। श्रीमती अनिता दग्दी के साथ अन्य प्रबंधक श्री शक्तिसिंह शेखावत, अजीतसिंह शेखावत और अश्विन पारिख जनता के पैसे नहीं लौटा रहे है। कंपनी द्वारा यह कहा जा रहा है कि यदि श्रीमती अनिता दग्दी कंपनी के अकाउंट में 7 लाख रूपये जमा करा देती है तो सभी को रूपयों की अदायगी हो जावेगी।

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उक्त लिखित आवेदन के आधार पर अभियुक्तगण के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 की एफआईआर दर्ज की गई। जांच में यह पाया कि स्टे वेल कंपनी जयपुर की फ्रेंचाइजी अधिकृत शाखा रतलाम की संचालक अनिता दग्दी थी, इस फ्रेंचाइजी का नाम मां कृपा इन्फोटेक हरमाला रोड लोकेंद्रनाथ मार्ग के पास में था। अभियुक्त श्रीमती अनिता ने विज्ञापन में बताया कि स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी जयपुर में यदि 25 हजार रूपये जमा करते हैं तो इसके बदले 9,600/- रूपये प्रतिमाह 12 माह तक नेट पर थोड़ा बहुत काम करने के पश्चात् 9,600/- रूपये कंपनी द्वारा दिया जाएगा। इस आधार पर फरियादी ने 09 लाख रुपए जमा कर स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी का सदस्य बना, इसके बाद फरियादी के भाई आशिफ ने भी स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी में नेटवर्किंग हेतु 50 हजार रुपए अनिता को नगद दिए थे। उसके बदले आशिफ को दिनांक 14/12/2012 को 19,200/- रूपये स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी द्वारा डी०डी० से भुगतान किया गया था। इस भुगतान के विश्वास में आने के बाद आशिफ ने भी दिनांक 11/02/2013 को 01 लाख का चैक स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी में जमा किया गया, ताकि आशिफ को रतलाम में कंपनी की शाखा खोलने की अनुमति मिल जाये। फरियादी वसीम के द्वारा 09 लाख रूपये व उसके भाई आसिफ द्वारा 01 लाख रूपये जमा करने के पश्चात अनिता दग्दी, शाखा रतलाम की संचालिका व स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी के प्रबंधकगण शक्ति सिंह शेखावत, अजीत सिंह, अश्विन पारिख द्वारा पैसे जमा करने के बावजूद विज्ञापन में दिए गए स्कीम अनुसार उन्हें लाभ न देकर उनके रूपये लेकर उनके साथ धोखाधड़ी की । जांच के दौरा दस्तावेज, चैक, खाता खोलने के दस्तावेज आदि जप्त कर अभियुक्तगण को गिरफ्तार कर साक्षियों के बयान लेखबद्ध कर अभियुक्त अनिता के हस्तलेख की जांच विज्ञान प्रयोगशाला से कराकर पुलिस द्वारा जांच पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। जिसका विचरण पूर्ण कर न्यायालय ने अभियुक्त अनीता दग्दी को दोषी माना व अभियुक्त शक्तिसिंह को दोषमुक्त कर दिया। अभियुक्त अनीता जमानत पर थी लेकिन सजा होते ही उसे अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।

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