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जमीन विवाद की शिकायत लेकर थाने पहुंचे युवक ने ओड़गी पुलिस पर मारपीट और शिकायत दर्ज न करने का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर। सूरजपुर जिले के ओड़गी थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जमीन विवाद की शिकायत लेकर थाना पहुंचे एक युवक ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज नहीं की, जबकि विपक्षी पक्ष की रिपोर्ट पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली गई। युवक ने यह भी दावा किया है कि शिकायत दर्ज कराने की मांग करने पर थाना परिसर में उसके साथ कथित रूप से मारपीट की गई।

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शिकायत दर्ज नहीं करने का आरोप

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शिकायतकर्ता के अनुसार, जमीन विवाद से जुड़ी घटना 21 जून 2026 की है। घटना के बाद वह लगातार दो दिनों तक थाना ओड़गी पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास करता रहा, लेकिन पुलिस ने न तो उसका आवेदन स्वीकार किया और न ही मामले की प्रारंभिक जांच की। युवक का कहना है कि न्याय की उम्मीद में वह बार-बार थाने पहुंचा, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई।

विपक्षी पक्ष की शिकायत पर तत्काल एफआईआर

युवक का आरोप है कि 22 जून को विपक्षी पक्ष को थाने बुलाया गया और उनकी शिकायत पर लगभग आधे घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज कर ली गई। इसे लेकर क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई है कि यदि एक पक्ष की शिकायत पर इतनी तेजी से कार्रवाई हो सकती है, तो दूसरे पक्ष की शिकायत को लगातार दो दिनों तक क्यों नहीं सुना गया। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

थाना परिसर में मारपीट का भी आरोप

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शिकायतकर्ता का दावा है कि 23 जून को जब वह दोबारा थाना पहुंचा और अपनी शिकायत पर कार्रवाई की मांग की, तब कथित रूप से पुलिसकर्मियों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट की। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है तथा पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

वायरल वीडियो से बढ़ी चर्चा

घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की भी जानकारी सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि वीडियो में युवक और पुलिसकर्मियों के बीच किसी वस्तु को लेकर खींचतान होती दिखाई दे रही है। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कई सवालों के जवाब बाकी

मामले को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं—

– युवक के हाथ में क्या था?

– खींचतान किस कारण हुई?

– क्या युवक के पास कोई दस्तावेज या साक्ष्य मौजूद था?

– क्या थाना परिसर का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है?

– क्या वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की विभागीय जांच कराएंगे?

इन सभी सवालों के जवाब फिलहाल जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

पुलिस का पक्ष आना बाकी

फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। पुलिस विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो, संबंधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ओड़गी थाना क्षेत्र का यह मामला अब केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़े कर रहा है। लोगों की निगाहें अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करते हैं या नहीं।

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