यमपुर से नेलाकांकेर तक दुर्गम इलाकों में पहुंचे; चार पीड़ित परिवारों से मिले, बच्चों को बांटे कपड़े और शैक्षणिक सामग्री
बीजापुर। बस्तर के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में बारिश, कीचड़ और कठिन रास्तों की परवाह किए बिना मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे। उद्देश्य था पीड़ित परिवारों का हाल जानना, उनकी समस्याएं समझना और उन्हें यह भरोसा दिलाना कि मुश्किल समय में समाज उनके साथ खड़ा है।
यमपुर (पामेड़) से नेलाकांकेर तक की यात्रा के दौरान बारिश और कीचड़ के कारण काफिले को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक वाहन कीचड़ में फंस गया, जबकि दूसरी गाड़ी खराब हो गई। इसके बावजूद यात्रा नहीं रोकी गई और महाराज जी ग्रामीणों के बीच पहुंचे।
चार नक्सल पीड़ित परिवारों को मिला सहयोग
यमपुर और नेलाकांकेर में डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने कुल चार नक्सल पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ महिलाओं को साड़ी तथा बच्चों को कपड़े, स्कूल बैग और शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई।
यमपुर में नक्सल हिंसा में वर्ष 2025 में जान गंवाने वाले सुन्नम सम्मैया और वेक्को संदीप के परिवारों से मुलाकात कर दोनों परिवारों को 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। सुन्नम सम्मैया की पत्नी नर्सम्मा और उनके दो छोटे बच्चों तथा वेक्को संदीप की पत्नी आरती और उनके नौ वर्षीय पुत्र से महाराज जी ने बातचीत कर उनकी परिस्थितियों की जानकारी ली।
ग्रामीणों के बीच बैठकर किया भोजन
दुर्गम रास्तों की कठिनाइयों के बावजूद महाराज जी ने ग्रामीणों के साथ समय बिताया और उनके बीच बैठकर भोजन किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों को दिव्य कवच और भभूति भी प्रदान की गई।
इसके बाद वे नेलाकांकेर पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। यहां उन्होंने वर्ष 2026 में नक्सल हिंसा में मारे गए 40 वर्षीय तिरुपति सोढ़ी के परिवार से मुलाकात की। पत्नी शांति और पांच संतानों वाले परिवार की स्थिति जानने के बाद उन्होंने 31 हजार रुपये की सहायता प्रदान की।
बेटी संध्या की शादी का खर्च उठाने की घोषणा
तिरुपति सोढ़ी की बेटी संध्या की शादी को लेकर डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि संध्या की शादी का पूरा खर्च वे स्वयं उठाएंगे और कन्यादान भी करेंगे। इस घोषणा से परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों में भावुकता का माहौल बन गया।
नेलाकांकेर में ही महाराज जी ने नक्सल हिंसा में वर्ष 2026 में मारे गए 23 वर्षीय रवि कट्टम के परिवार से भी मुलाकात की। रवि अपने परिवार की इकलौती संतान थे। परिवार की स्थिति जानने के बाद उन्होंने 31 हजार रुपये की सहयोग राशि दी और भविष्य में भी यथासंभव मदद का भरोसा दिलाया।
बच्चों को अपने हाथों से पहनाई चप्पल
सहायता वितरण के दौरान बच्चों के प्रति महाराज जी का आत्मीय व्यवहार भी देखने को मिला। उन्होंने बच्चों को कपड़े, स्कूल बैग, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स और चप्पल वितरित कीं। कई बच्चों के पैरों में उन्होंने स्वयं चप्पल पहनाई। इस दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और परिवारों में भावुकता का माहौल नजर आया। महिलाओं को भी साड़ियां वितरित की गईं।
बोले- पीड़ित परिवारों को एहसास होना चाहिए कि वे अकेले नहीं
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा का उल्लेख करते हुए उन्हें ‘देव पुरुष’ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से बस्तर में शांति और सामान्य जीवन की उम्मीद मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा केवल उनकी निजी पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। ऐसे परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनना और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। सहायता का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को यह विश्वास दिलाना है कि वे अकेले नहीं हैं और समाज उनके साथ खड़ा है।




