मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में अचानक प्रवाहित हुआ करंट, अस्पताल में उपचार के दौरान तोड़ा दम; हादसे की तकनीकी जांच की मांग,
अम्बिकापुर। प्रतीक्षा बस स्टैंड के समीप निर्माणाधीन वसुंधरा सिटी मॉल में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। निर्माण स्थल पर मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में अचानक विद्युत करंट प्रवाहित होने से बेलखेरिखा निवासी अशोक कुमार श्याम इसकी चपेट में आ गए। गंभीर हालत में उन्हें संजीवनी अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
- मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में अचानक प्रवाहित हुआ करंट, अस्पताल में उपचार के दौरान तोड़ा दम; हादसे की तकनीकी जांच की मांग,
- सामान लोड करते समय ट्रॉली में दौड़ा करंट
- हादसा दुर्घटना या सुरक्षा में चूक? जांच से होगा खुलासा
- हादसे के बाद उठ रहे कई सवाल
- श्रम विभाग की निगरानी पर भी सवाल
- केवल मुआवजा नहीं, हादसे की जिम्मेदारी भी तय हो
- आज अशोक गया, कल किसी और परिवार की बारी न हो
हादसे के बाद निर्माणाधीन बड़े व्यावसायिक परिसर में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि हादसा किस तकनीकी कारण से हुआ, यह जांच का विषय है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी होगा कि निर्माण स्थल पर विद्युत सुरक्षा, अर्थिंग, वायरिंग और श्रमिकों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय निर्धारित मानकों के अनुरूप थे या नहीं।
सामान लोड करते समय ट्रॉली में दौड़ा करंट
जानकारी के अनुसार अशोक कुमार श्याम निर्माणाधीन मॉल में मजदूरी करते थे। सोमवार को वह अन्य दिनों की तरह निर्माण कार्य में लगे हुए थे। बताया जा रहा है कि वह मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में निर्माण सामग्री लोड कर रहे थे। इसी दौरान ट्रॉली में अचानक विद्युत करंट प्रवाहित हो गया और अशोक उसकी चपेट में आ गए।
करंट लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। सहकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
हादसा दुर्घटना या सुरक्षा में चूक? जांच से होगा खुलासा
हादसे के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में करंट किस वजह से प्रवाहित हुआ। क्या यह अचानक हुई विद्युत तकनीकी खराबी थी या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर चूक हुई?
इसका जवाब तकनीकी और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के साथ निर्माण स्थल की विद्युत एवं श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच जरूरी मानी जा रही है।
हादसे के बाद उठ रहे कई सवाल
- मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में उचित अर्थिंग की व्यवस्था थी या नहीं?
- विद्युत वायरिंग और उपकरणों की नियमित जांच एवं मेंटेनेंस किया गया था या नहीं?
- श्रमिकों को सेफ्टी शूज, इंसुलेटेड दस्ताने और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं?
- निर्माण स्थल पर जिम्मेदार सेफ्टी अधिकारी या सुपरवाइजर मौजूद था या नहीं?
- मृतक मजदूर का नियमानुसार पंजीयन और श्रमिक रिकॉर्ड उपलब्ध था या नहीं?
- निर्माण स्थल का श्रम विभाग एवं विद्युत सुरक्षा से संबंधित अधिकारियों द्वारा अंतिम निरीक्षण कब किया गया था?
- क्या निर्माण एजेंसी द्वारा सुरक्षा मानकों का कोई प्रमाणित ऑडिट कराया गया था?
इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा केवल एक आकस्मिक दुर्घटना था या सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही अथवा तकनीकी खामी की भूमिका थी।
श्रम विभाग की निगरानी पर भी सवाल
अम्बिकापुर शहर में लगातार बड़े व्यावसायिक और बहुमंजिला निर्माण कार्य चल रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते हैं। ऐसे निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार विभागों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अशोक कुमार श्याम की मौत के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि निर्माणाधीन बड़े प्रोजेक्ट्स में श्रमिक सुरक्षा की नियमित जांच किस स्तर पर की जा रही है। यदि नियमित निरीक्षण हुआ था तो क्या विद्युत उपकरणों और मटेरियल लिफ्ट जैसी व्यवस्थाओं की सुरक्षा भी जांच के दायरे में थी?
वहीं, यदि लंबे समय से निरीक्षण नहीं हुआ था तो इतने बड़े निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी—यह भी जांच का विषय है।
केवल मुआवजा नहीं, हादसे की जिम्मेदारी भी तय हो
मृतक के परिजनों को नियमानुसार सहायता और मुआवजा मिलना जरूरी है, लेकिन इसके साथ हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
विद्युत विभाग, श्रम विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी की मौजूदगी में तकनीकी जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि करंट ट्रॉली तक कैसे पहुंचा, सुरक्षा व्यवस्था में क्या-क्या प्रावधान थे और हादसे के समय वे प्रभावी रूप से काम कर रहे थे या नहीं।
यदि जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी या किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति, एजेंसी या प्रबंधन की जिम्मेदारी नियमानुसार तय की जानी चाहिए।
आज अशोक गया, कल किसी और परिवार की बारी न हो
अशोक कुमार श्याम की मौत केवल उनके परिवार के लिए एक बड़ी त्रासदी नहीं है, बल्कि निर्माण स्थलों पर श्रमिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चेतावनी है। बड़े मॉल और बहुमंजिला इमारतें विकास की पहचान हो सकती हैं, लेकिन इनके निर्माण में लगे श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब प्रशासन से अपेक्षा है कि वसुंधरा सिटी मॉल निर्माण स्थल की विद्युत वायरिंग, अर्थिंग, मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली, सुरक्षा उपकरणों, श्रमिक पंजीयन और पूर्व निरीक्षण रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी को सामने लाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।




